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थलापति विजय और उनकी पत्नी संगीता की तलाक की खबरों ने सिर्फ फैंस को बल्कि इंडस्ट्री के बड़े-बड़े स्टार्स को चौंका दिया है. इंडस्ट्री से लेकर आम लोगों के विजय और संगीता के तलाक की चर्चा हो रही है. दोनों की शादी को 27 साल हो चुके हैं. तलाक के चर्चा के साथ ही एलिमनी की भी चर्चा होने लगी है. थलापति के पास 600 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी है.
थलापति विजय से तलाक लेने के लिए संगीता ने तमिलनाडु के चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की. उन्होंने विजय पर एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर के आरोप लगाए और कोर्ट से अनुरोध किया है कि विजय की आय और सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित और न्यायसंगत गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया जाए. लेकिन भारतीय कानून के अनुसार उनकी 600 करोड़ रुपये की संपत्ति का 50% हिस्सा बांटना जरूरी नहीं है. कोर्ट क्या फैसला ले सकता है, यहां जानिए.
सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर फैसला संगीता के पक्ष में आता है, तो क्या विजय को अपनी संपत्ति का 50% हिस्सा देना पड़ेगा? अंश्रीधर वेंबू और प्रमिला श्रीनिवासन का तलाक सबसे महंगा माना जा रहा है, जिसमें करीब 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति शामिल है. साल 2014 में ऋतिक रोशन और सुज़ैन खान के तलाक में करीब 380 करोड़ रुपये की संपत्ति का मामला सामने आया था. इसी संदर्भ में लोग सवाल कर रहे हैं कि विजय की 600 करोड़ रुपये की संपत्ति में से क्या संगीता को 50% हिस्सा मिल सकता है?
इसका सीधा जवाब है- नहीं. भारतीय कानून के अनुसार तलाक के बाद पत्नी को पति की संपत्ति का 50% हिस्सा देना अनिवार्य नहीं है. ’50-50 संपत्ति विभाजन’ का मॉडल कुछ वेस्टर्न देशों में आम है, लेकिन भारत में कानून अलग है. भारत में ‘कम्युनिटी प्रॉपर्टी’ का कॉन्सेप्ट नहीं है, यानी शादी के दौरान जमा की कई संपत्ति का बराबर बंटवारा नहीं होता. शादी से पहले या व्यक्तिगत नाम पर खरीदी गई संपत्ति आमतौर पर उसी व्यक्ति के पास रहती है.
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भारतीय कोर्ट का मुख्य ध्यान न्याय पर होता है. कोर्ट दोनों पक्षों की आय, घर में योगदान, बच्चों की जरूरतें और शादी के दौरान लाइफ स्टाइल जैसे पहलुओं को देखता है. सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाता है. गुजारा भत्ता या मेंटेनेंस संपत्ति के बंटवारे से अलग है. यह वह आर्थिक सहायता है जो अधिक कमाने वाला पति या पत्नी दूसरे साथी को देता है ताकि उसकी आर्थिक सुरक्षा बनी रहे.
हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 25 के तहत कोर्ट को ‘उचित और न्यायसंगत’ राशि स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में देने का अधिकार है. कुछ मामलों में कोर्ट ने पति की मासिक आय का 25% तक गुजारा भत्ता दिया है, लेकिन कोई तय फॉर्मूला नहीं है और हर मामला अपनी परिस्थितियों के अनुसार देखा जाता है. भारत में कोई बड़ा उदाहरण नहीं है जहां कोर्ट ने पति को अपनी कुल संपत्ति का 50% देने का आदेश दिया हो.
साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट के रिंकू बहेटी बनाम संदीश शराडा मामले में पत्नी को 12 करोड़ रुपये स्थायी गुजारा भत्ता मिला, लेकिन यह पति की कुल संपत्ति का आधा नहीं था. इसी तरह ऋतिक रोशन और सुज़ैन खान के तलाक में करीब 380 करोड़ रुपये का समझौता हुआ, लेकिन यह कोर्ट द्वारा 50% संपत्ति देने का आदेश नहीं था, बल्कि आपसी सहमति से हुआ था.
विजय और संगीता के मामले में, संगीता ने अपनी याचिका में भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक उपेक्षा के साथ-साथ एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर का आरोप लगाया है. कोर्ट 27 साल की शादी, दो बच्चों और विजय की फिल्मी व राजनीतिक कमाई जैसे पहलुओं को ध्यान में रखेगा.
भले ही विजय की कुल संपत्ति 600 करोड़ रुपये से ज्यादा हो, लेकिन कोई कानूनी प्रावधान नहीं है कि संपत्ति का 50% हिस्सा स्वतः ट्रांसफर करना पड़े. संयुक्त रूप से खरीदी गई संपत्तियों का मामला अलग होगा. संगीता की व्यक्तिगत संपत्ति, जैसे गहने और उनके नाम पर रियल एस्टेट, उन्हीं के पास रहेगा. गुजारा भत्ता मासिक भुगतान या एकमुश्त राशि के रूप में दिया जा सकता है. विजय की बड़ी संपत्ति और राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, कोर्ट द्वारा तय की गई राशि काफी हो सकती है. लेकिन कानूनन यह जरूरी नहीं है कि यह उनकी कुल संपत्ति का आधा हो.
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