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Food Noise Disorder Explained; What It Is ?


10 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा

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फर्ज करिए, आपने सुबह भरपेट नाश्ता किया और ऑफिस पहुंच गए। लैपटॉप खोला और मीटिंग में बैठ गए। प्रेजेंटेशन दे रहे हैं या किसी जरूरी रिपोर्ट पर काम कर रहे हैं, तभी अचानक दिमाग में बिरयानी की खुशबू या केक की मिठास का ख्याल आने लगता है। ये ख्याल एक बार नहीं, बार-बार आता है। आप कोशिश करते हैं कि काम पर फोकस करें, लेकिन दिमाग बार-बार खाने की तरफ चला जाता है।

पेट भरा हुआ है, भूख भी नहीं है। फिर भी मन में सिर्फ खाने की बातें घूमती रहती हैं। जब और ध्यान भटका देते हैं, तो इस स्थिति को फूड नॉइज कहा जाता है।

क्लिनिकल न्यूट्रिशन जर्नल ‘नेचर न्यूट्रिशन’ में पब्लिश एक पीयर-रिव्यूड स्टडी के अनुसार, फूड नॉइज भूख न होने पर भी खाने से जुड़े ख्याल होते हैं, जो बार-बार दिमाग में आते हैं। स्टडी के मुताबिक, दिमाग इन विचारों को लूप में दोहराता रहता है और यह काम, आराम या सोशल लाइफ से ध्यान भटका सकता है।

इसलिए आज की जरूरत की खबर में हम जानेंगे कि-

• फूड नॉइज क्या है?

• फूड नॉइज क्यों होती है?

• इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है?

एक्सपर्ट: डॉ. आशीष मेहरोत्रा, कंसल्टेंट, क्रिटिकल केयर, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर

सवाल- फूड नॉइज क्या है?

जवाब- फूड नॉइज यानी दिमाग में लगातार उठ रहे खाने से जुड़े ख्याल। फूड नॉइज के कारण पेट भरा होने के बाद भी मन बार-बार खाने की तरफ खिंचता रहता है। क्या खाएं, कब खाएं या फिर कुछ और खा लें, ऐसे ख्याल दिमाग में घूमते रहते हैं।

मेडिसिनल लैंग्वेज में इसे ऐसे समझा जाता है कि दिमाग का एक सिस्टम होता है। यही सिस्टम भूख को कंट्रोल करता है। यही संतुष्टि और रिवॉर्ड थॉट (इनाम की भावना) को संभालता है। साथ ही यह तनाव पर भी असर डालता है। जब यह सिस्टम सही तालमेल में काम नहीं करता, तो खाने से जुड़ी सोच बार-बार दिमाग में आने लगती है।

सवाल- फूड नॉइज क्यों होती है?

जवाब- फूड नॉइज सिर्फ एक वजह से नहीं होती। इसके पीछे शरीर और दिमाग से जुड़े कई कारण मिलकर काम करते हैं। अगर आप समय पर खाना नहीं खाते या मील स्किप करते हैं, तो शरीर में भूख बढ़ाने वाले हॉर्मोन ज्यादा बनने लगते हैं। इससे दिमाग बार-बार खाने का सिग्नल भेजता है।

अगर वेस्ट फैट (पेट के आसपास चर्बी) ज्यादा होती है, तो ब्रेन को भोजन से संतुष्टि का संदेश नहीं मिल पाता है। लंबे समय तक तनाव में रहने से स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ जाता है।

बहुत ज्यादा मीठा खाने से दिमाग की खुशी महसूस करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। फिर वही खुशी पाने के लिए दिमाग बार-बार खाने की मांग करता है। इन्हीं सब कारणों के मिल जाने से फूड नॉइज बढ़ने लगती है।

इसके अलावा कुछ और फैक्टर्स भी हैं। आइए, इसे ग्राफिक से समझते हैं-

इन सभी कारणों का असर मिलकर दिमाग को यह महसूस कराता है कि खाना चाहिए, भले ही उसे असल में इसकी जरूरत न हो।

सवाल- फूड नॉइज के क्या संकेत होते हैं?

जवाब- कई लोगों को ऐसा लगता है कि दिमाग बार-बार खाने की तरफ जा रहा है। यह सोच रोजमर्रा के कामों के दौरान बैकग्राउंड में चलती रहती है और बोरियत या तनाव आते ही अचानक हावी हो जाती है। फूड नॉइज के संकेत को नीचे दिए गए पॉइंट्स से आसानी से समझा जा सकता है-

  • पेट भरा होने के बावजूद खाना खाने के थोड़ी देर बाद ही फिर क्रेविंग महसूस होना।
  • बिना भूख के मीठा या ज्यादा फैट वाले खाने की तेज इच्छा होना।
  • बार-बार स्नैक्स खाने का मन करना।
  • खाने को लेकर गिल्ट, बेचैनी या जल्दी-जल्दी खाने का दबाव।
  • मूड में बार-बार बदलाव महसूस होना।
  • नींद न आना या बार-बार टूटना।
  • बेवजह थकान और कम एनर्जी महसूस होना।
  • अनियमित खाने, तनाव या हॉर्मोनल असंतुलन के दौरान इन लक्षणों का ज्यादा बढ़ जाना।

सवाल- भूख लगने और फूड नॉइज में क्या अंतर है?

जवाब- खाने के बारे में सोचना हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का सामान्य हिस्सा है। लेकिन सवाल यह है कि जो विचार दिमाग में आ रहे हैं, वे सामान्य फूड थॉट्स हैं या फिर फूड नॉइज। ग्राफिक्स से समझते हैं-

सवाल- फूड नॉइज कब समस्या बन सकती है?

जवाब- फूड नॉइज तब समस्या बन सकती है, जब यह सामान्य खाने की इच्छा से आगे बढ़कर रोजमर्रा की जिंदगी पर हावी होने लगे।

  • हर समय खाने के बारे में सोचना
  • खाने के बाद भी गिल्ट या शर्म महसूस होना
  • बार-बार खाने से जुड़ा कंटेंट देखना
  • दिमाग का हर समय हर समय उलझे रहना कि क्या खाएं और कब खाएं

तो यह संकेत है कि फूड नॉइज एक समस्या बन रही है।

इतना ही नहीं, कई लोग इस चिंता के कारण सोशल इवेंट्स से भी दूर हो जाते हैं। जब खाने के विचार इस हद तक दिमाग पर हावी हो जाएं कि यह मूड, फोकस और लाइफस्टाइल को प्रभावित करने लगे, तब यह साफ तौर पर फूड नॉइज की समस्या बन जाती है।

सवाल- फूड नॉइज से कैसे डील करें?

जवाब- फूड नॉइज को कम करने की शुरुआत शरीर के उन सिस्टम्स को संतुलित करने से होती है, जो भूख और पाचन को कंट्रोल करते हैं। जब शरीर को सही समय पर सही पोषण मिलता है और लाइफस्टाइल थोड़ी बैलेंस होती है, तो दिमाग को बार-बार खाने के सिग्नल भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। इसे ग्राफिक से समझते हैं-

फूड नॉइज से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब

सवाल- फूड नॉइज का वजन बढ़ने से क्या संबंध है?

जवाब- नहीं, फूड नॉइज का वजन या डाइटिंग से सीधे कोई संबंध नहीं है। हालांकि, अगर किसी को लंबे समय तक फूड नॉइज की समस्या बनी हुई है तो उसका वजन बढ़ सकता है।

सवाल- क्या फूड नॉइज किसी विशेष फूड से जुड़ा होता है?

जवाब- नहीं, फूड नॉइज किसी भी तरह के खाने से जुड़ा हो सकता है।

सवाल- क्या फूड नॉइज सिर्फ मानसिक समस्या है या इसका शरीर पर भी असर होता है?

जवाब- फूड नॉइज मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से असर डाल सकता है। यह मूड, नींद, एनर्जी लेवल और पाचन पर भी प्रभाव डालता है।कई बार यह वजह बढ़ने का भी कारण बन सकता है।

सवाल- क्या फूड नॉइज बच्चों और बुजुर्गों में भी हो सकता है?

जवाब- हां, यह उम्र पर निर्भर नहीं करता। बच्चों में यह अक्सर भावनात्मक कारणों से तो बुजुर्गों में हॉर्मोनल बदलाव या तनाव के कारण होता है।

सवाल- क्या फूड नॉइज पूरी तरह रोक पाना संभव है?

जवाब- इसे पूरी तरह कंट्रोल करना तो मुश्किल हो सकता है, लेकिन सही खाने की आदतें अपनाकर इसे काफी हद तक कम कर किया जा सकता हैं।

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