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Plastic Feeding Bottle Health Risks; Microplastics Side Effects


41 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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आपने अपने आसपास घरों में कभी-न-कभी छोटे बच्चों को प्लास्टिक की बोतल से दूध पीते जरूर देखा होगा। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के मुताबिक, भारत में तीन साल से कम उम्र के हर पांच में से एक बच्चे को प्लास्टिक की बोतल से दूध पिलाया जाता है। आपको यह बात बहुत नॉर्मल लग रही होगी। लेकिन इसकी वजह से 3 साल की उम्र तक बच्चे लाखों माइक्रोप्लास्टिक पार्टिकल्स इनहेल कर चुके होते हैं।

फरवरी, 2025 में ‘साइंस डायरेक्ट’ में एक स्टडी पब्लिश हुई। चीन के शंघाई में हुई इस स्टडी के मुताबिक, प्लास्टिक फीडिंग बोतलें प्रति लीटर 1465 से 5893 माइक्रोप्लास्टिक कण छोड़ती हैं। इन बोतलों को उबालने या उसमें गर्म दूध रखने पर इसकी मात्रा दोगुनी तक हो जाती है। इससे शिशु रोज 2080 से 5910 तक माइक्रोप्लास्टिक कण निगल सकते हैं। ये स्टडी बच्चों की सुरक्षा के लिए नॉन-प्लास्टिक बोतलों के इस्तेमाल की सलाह देती है।

ऐसी ही एक स्टडी साल 2020 में नेचर जर्नल में पब्लिश हुई थी। इसमें बताया गया था कि तय गाइडलाइंस के मुताबिक फॉर्मूला मिल्क तैयार करने पर भी प्लास्टिक बोतल से प्रति लीटर 13 लाख से 1.62 करोड़ तक माइक्रोप्लास्टिक कण रिलीज हो सकते हैं। इससे पता चलता है कि प्लास्टिक बोतलें शिशुओं के लिए माइक्रोप्लास्टिक एक्सपोजर का एक बड़ा सोर्स हैं।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम प्लास्टिक फीडिंग बोतलों के खतरों के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • प्लास्टिक फीडिंग बोतल में ऐसे कौन से तत्व होते हैं, जो शिशुओं के लिए खतरनाक हैं?
  • शिशु को दूध पिलाने का सुरक्षित तरीका क्या है?

एक्सपर्ट: डॉ. जितेन्द्र जैन, सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक्स, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल- प्लास्टिक फीडिंग बोतल में ऐसे कौन-कौन से तत्व होते हैं, जो शिशुओं के लिए खतरनाक होते हैं?

जवाब- प्लास्टिक बोतल में कई ऐसे केमिकल्स होते हैं, जो शिशुओं के विकास में बाधा बन सकते हैं। गर्म करने, उबालने या लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान ये तत्व प्लास्टिक बोतल से रिलीज होकर दूध या पानी में मिल सकते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से बेबी बोतल में पाए जाने वाले खतरनाक केमिकल्स के बारे में समझिए-

सवाल- दूध की बोतल में मौजूद तत्व बीपीए (Bisphenol-A) क्या है?

जवाब- यह एक तरह का केमिकल है, जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए किया जाता है। फीडिंग बोतलों, सिप्पी कप और फूड कंटेनर्स में इसका उपयोग किया जाता है। इन प्रोडक्ट्स को गर्म करने, उबालने या लंबे समय तक इस्तेमाल से BPA दूध या पानी में मिल सकता है, जो सेहत के लिए नुकसानदायक है।

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने साल 2015 में बच्चों के इस्तेमाल में लाई जाने वाली प्लास्टिक बोतलों में BPA के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन हैरानी की बात ये है कि अब भी कई कंपनियां इस केमिकल का इस्तेमाल कर रही हैं।

सवाल- बीपीए (Bisphenol-A) इंसान के शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

जवाब- BPA एक एंडोक्राइन डिसरप्टर है यानी यह शरीर के हाॅर्मोन सिस्टम में गड़बड़ी पैदा करता है। यह एस्ट्रोजन जैसे हाॅर्मोन की कॉपी करता है, जिससे हाॅर्मोन संतुलन बिगड़ सकता है। लंबे समय तक इसके संपर्क से इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है। ब्रेन और नर्वस सिस्टम के विकास पर असर पड़ सकता है।

कुछ स्टडीज में इसे हार्ट डिजीज, लिवर डिजीज, मेटाबॉलिक प्रॉब्लम्स (जैसे मोटापा और डायबिटीज) और कुछ प्रकार के कैंसर से भी जोड़ा गया है। शिशु और छोटे बच्चे इसके दुष्प्रभावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनका शरीर अभी डेवलपिंग स्टेज में होता है।

सवाल- माइक्रोप्लास्टिक किसी भी ह्यूमन बॉडी के लिए खतरनाक है, लेकिन यह शिशुओं के लिए ज्यादा खतरनाक क्यों है?

जवाब- दरअसल शिशुओं का इम्यून सिस्टम, पाचन तंत्र और ब्रेन डेवलपमेंट शुरुआती फेज में होता है। इसलिए माइक्रोप्लास्टिक उनके लिए ज्यादा नुकसानदायक होता है। शिशुओं का शरीर छोटा और वजन कम होता है, इसलिए माइक्रोप्लास्टिक का प्रभाव उन पर वयस्कों की तुलना में ज्यादा होता है।

इसके अलावा शिशुओें को ज्यादातर लिक्विड डाइट दी जाती है। साथ ही वे फीडिंग बोतलों, टीथर व खिलौनों के संपर्क में ज्यादा रहते हैं। इससे माइक्रोप्लास्टिक उनके शरीर में पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

सवाल- शिशुओं को प्लास्टिक बोतल से दूध पिलाने पर उनकी सेहत पर क्या असर पड़ता है?

जवाब- लंबे समय तक प्लास्टिक बोतल से दूध पिलाने पर शिशु के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक और कुछ खतरनाक केमिकल्स पहुंच सकते हैं। इससे कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- लॉन्ग टर्म में माइक्रोप्लास्टिक के क्या साइड इफेक्ट हो सकते हैं?

जवाब- लंबे समय तक माइक्रोप्लास्टिक के एक्सपोजर से ये शरीर में जमा होकर क्रॉनिक इंफ्लेमेशन पैदा कर सकते हैं। इससे पाचन तंत्र, इम्यून सिस्टम और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है।

सवाल- लोगों को लगता है कि उबालने से बोतल के बैक्टीरिया मर जाते हैं। क्या ये बात सही है?

जवाब- उबालने या गर्म पानी से स्टरलाइज करने पर बोतल में मौजूद बैक्टीरिया तो मर जाते हैं, लेकिन इससे माइक्रोप्लास्टिक और अन्य खतरनाक केमिकल्स रिलीज होते हैं। रिसर्च में पाया गया है कि जितने अधिक तापमान पर बोतल को स्टरलाइज किया जाता है, उतनी ही ज्यादा मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक रिलीज होते हैं। यानी उबालना बैक्टीरिया के लिए असरदार है, लेकिन लंबे समय में यह शिशु के लिए कई तरह के हेल्थ रिस्क पैदा कर सकता है। इसलिए डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि शिशुओं को दूध पिलाने के लिए नॉन-प्लास्टिक विकल्प अपनाएं।

सवाल- शिशु को दूध पिलाने के लिए प्लास्टिक बोतलों का विकल्प क्या है?

जवाब- प्लास्टिक की जगह कांच या स्टील की बोतल का इस्तेमाल करना चाहिए। ये सबसे अच्छी होती हैं। इन्हें आसानी से साफ किया जा सकता है। ठंडे–गर्म के साथ यह केमिकली रिएक्ट नहीं करती हैं। इन्हें उबाल भी सकते हैं, फ्रिज में भी रख सकते हैं। हर स्थिति में यह सुरक्षित है।

सवाल– शिशु को दूध पिलाने का सुरक्षित तरीका क्या है?

जवाब- इसके लिए जहां तक संभव हो ब्रेस्टफीडिंग को प्राथमिकता दें। साथ ही कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- मार्केट में बहुत सी ऐसी प्लास्टिक बोतलें भी मिलती हैं, जिन पर ‘BPA-Free’ लिखा होता है। क्या ये वाकई ‘BPA-Free’ और पूरी तरह सुरक्षित होती हैं?

जवाब- ‘BPA-Free’ लेबल का मतलब सिर्फ ये है कि उस बोतल में बिसफेनॉल-A नहीं यूज किया गया है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि वह पूरी तरह सुरक्षित है। कई मामलों में BPA की जगह BPS, BPF या अन्य प्लास्टिक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इनका शरीर पर असर BPA जैसा ही हो सकता है।

इसके अलावा BPA-Free बोतलें भी गर्म करने, उबालने या बार-बार इस्तेमाल करने पर माइक्रोप्लास्टिक छोड़ सकती हैं। इसलिए ‘BPA-Free’ बोतलों को पूरी तरह रिस्क-फ्री नहीं कहा जा सकता है। इसलिए जहां तक संभव हो, ग्लास, स्टील या अन्य नॉन-प्लास्टिक विकल्प ही यूज करें।

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