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जब मोहम्मद रफी ने लौटाया ब्लैंक चेक, गाया कालजयी गाना, चूर-चूर हुआ प्रोड्यूसर का घमंड


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Mohammed Rafi Ke Superhit Gane : लीजेंड सिंगर बहुत ही नेक इंसान थे. बहुत ही शांत स्वभाव के थे. किशोर कुमार उनका बहुत सम्मान करते थे. उनकी आवाज के दीवाने थे. संगीतकार रवि और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल तो अपनी हर फिल्म में एक गाना रफी साहब से जरूर गवाया करते थे. रफी साहब ने कई मौकों पर साबित किया कि गायकी उनका पैशन है, वो सिर्फ पैसे के लिए नहीं गाएंगे. बॉलीवुड के एक प्रोड्यूसर ने तो एक बार रफी साहब के पास ब्लैंक चेक तक भिजवा दिया था. मोहम्मद रफी ने बहुत ही विनम्रता से चेक लौटा दिया. फिर क्या हुआ, आइये जानते हैं पूरा किस्सा…..

यह किस्सा बॉलीवुड के उस दिग्गज निर्माता-निर्देशक का है जिन्होंने ‘नया दौर’ ‘वक्त, ‘इंसाफ का तराजू’ और ‘निकाह’ जैसी फिल्में बनाई हैं. महाभारत जैसा ऐतिहसिक धारावाहिक बनाया है. डायरेक्टर-प्रोड्यूसर बीआर चोप‌ड़ा का रफी साहब से विवाद का किस्सा जगजाहिर है. एक बार बीआर चोपड़ा ने रफी साहब के पास ब्लैंक चेक भी भिजवाया था. मोहम्मद रफी ने यह चेक लौटा दिया. उन्होंने फिल्म में गाना गाया. गाना कालजयी साबित हुआ. आज भी जिंदगी की परेशानी से गुजर रहा हर शख्स इस गाने की चंद लाइनें गुनगुनाकर सुकून तलाशने की कोशिश करता है. पूरा किस्सा आइये जानते हैं…….

नया दौर फिल्म में कुल 9 गाने रखे गए थे. म्यूजिक सुपरहिट था. फिल्म के सुपरहिट गानों में ‘आना है तो आ, राह में देर नहीं है, भगवान के घर देर है अंधेर नहीं है, ये देश है वीर जवानों का, मांग के साथ तुम्हारा, मैंने मांग लिया संसार, उड़े जब-जब जुल्फें तेरी, साथी हाथ बढ़ाना, रेश्मी सलवार कुर्ता जाली का’ जैसे गाने शामिल थे. ‘नया दौर’ के 5 गाने रफी साहब ने गए थे. 3 गाने सोलो थे.

नया दौर ने बीआर चोपड़ा को इंडस्ट्री में स्थापित किया. वो टॉप डायरेक्टर-प्रोड्यूसर की लिस्ट में शामिल हो गए. बीआर चोपड़ा का पूरा नाम बलदेव राज चोपड़ा था. वो मशहूर डायरेक्टर-प्रोड्यूसर यश चोपड़ा के बड़े भाई थे. नया दौर 1957 की दूसरी कामयाब फिल्म थी. पहले नंबर पर मदर इंडिया थी. फिल्म के बजट की कोई सही जानकारी नहीं है. फिल्म ने करीब 4 करोड़ का कलेक्शन किया था. 2 करोड़ का नेट कलेक्शन था. फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. फिल्म की सफलता के बाद प्रोड्यूसर बीआर चोपड़ा का अहंकार सातवें आसमान पर था.

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कहा जाता है कि ‘नया दौर’ की टीम के साथ बीआर चोपड़ा एक कॉन्ट्रेक्ट साइन करना चाहते थे. कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक ‘नया दौर’ टीम के मेंबर किसी और प्रोडक्शन हाउस के साथ काम नहीं कर सकते थे. यह प्रस्ताव लेकर बीआर चोपड़, रफी साहब के पास गए लेकिन रफी को बात समझ नहीं आई. रफी साहब ने बहुत ही विनम्रता से बीआर चोपड़ा का ऑफर ठुकरा दिया. उन्होंने कहा कि मेरी आवाज आवाम की अमानत है. इसे मैं किसी एक स्टूडियो में कैद नहीं कर सकता. बस इस इनकार ने बीआर चोपड़ा के ईगो को गहरी ठोस पहुंचाई. उन्होने इंडस्ट्री में एक नया रफी खड़ा करने की ठानी.

उन्होंने गायक महेंद्र कपूर पर अपना सारा पैसा लगाना शुरू किया. इधर महान संगीतकार रवि अंदर ही अंदर घुटने लगे. वो रफी साहब को बहुत पसंद करते थे. वो अपनी धुने रफी साहब को ध्यान में रखकर बनाते थे लेकिन बीआर चोपड़ा की जिद के आगे वो गाने महेंद्र कपूर से रिकॉर्ड करवाते थे.

फिर आया साल 1965. इस साल बीआर चोपड़ा की एक फिल्म ‘वक्त’ रिलीज हुई. इस फिल्म के टाइटल ट्रैक की धुन जब बनाई तो उनके सब्र का बांध टूट गया. उन्होंने बीआर चोपड़ा से कहा कि अगर रफी साहब इस गाने को नहीं गाएंगे तो यह गाना बनेगा ही नहीं.

जब चोपड़ा ने वो धुन सुनी तो उनका घमंड टूटकर बिखर गया. वक्त फिल्म का यह गाना था : वक्त से दिन और रात, वक्त से कल और आज, वक्त की हर शै गुलाम, वक्त का हर शै पर राज. गाने की धुन सुनए के बाद बीआर चोपड़ा ने तुरंत मोहम्मद रफी के घर पर एक ब्लैंक चेक भिजवाया. रफी साहब ने मुस्कुराते हुए वो ब्लैंक चेक लौटा दिया और कहा कि मेरी आवाज को पैसों के तराजू में मत तौलिए. मैं सिर्फ अपनी आम फीस लूंगा.

जब वो सदाबहार गाना रिकॉर्ड हुआ तो बीआर चोपड़ा की आंखें नम हो गईं. चोपड़ा साहब ने भारी आवाज में मान लिया कि दौलत से दुनिया की हर चीज खरीदी जा सकती है लेकिन दूसरा मोहम्मद रफी कभी पैदा नहीं किया जा सकता. रफी साहब ने यह गाना जिस अंदाज में गाया, उसे बयां नहीं किया जा सकता. गाना आज भी पॉप्युलर है. फिल्म में मन्नाडे साहब का गाया हुआ ‘ऐ मेरी जोहराजबी’ फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना था. वक्त 1965 की ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई. वक्त को 5 फिल्म फेयर अवॉर्ड मिले थे. बेस्ट डायरेक्टर यश चोपड़ा, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर राजकुमार, बेस्ट स्टोरी एफए मिर्जा, बेस्ट डायलॉग अख्तर उल ईमान, बेस्ट सिनेमेटोग्राफी धर्म चोपड़ा. फिल्म का बजट 30-32 लाख रुपये मान जाता है. मूवी ने करीब 3 करोड़ की कमाई की थी. फिल्म ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई. 1965 की टॉप फिल्म थी.

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