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साल 1960 में के. आसिफ फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ लेकर आए थे. पूरी दुनिया इस फिल्म की दीवानी हो गई थी. 15 साल में बनकर तैयार हुई फिल्म पर उस दौर में 1.5 करोड़ रुपये लग गए थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म के लिए मधुबाला पहली पसंद नहीं थीं.
नई दिल्ली. के. आसिफ की फिल्म’मुगल-ए-आजम’ में दिलीप कुमार और मधुबाला ने सलीम और अनारकली का रोल निभाया था. सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी अमर हो गई थी. इस फिल्म पर डायरेक्टर ने अपनी पूरी जान झोक दी थी, इसके चलते फिल्म को बनने में 15 साल लग गए थे.
महज 1.5 करोड़ रुपये में बनी इस फिल्म ने उस दौर में बॉक्स ऑफिस पर 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजनेस किया था. पहले ये फिल्म ब्लैक एंड व्हाइट थी, लेकिन दोबारा रिलीज करने के लिए इसे कलर किया गया था और ऐसा करने वाली ये वर्ल्ड सिनेमा के इतिहास की पहली फीचर फिल्म बन गई थी.
आज भी इस फिल्म की कहानी और गानों को लोग भूल नहीं पाए हैं. फिल्म पर पानी की तरह पैसा लगाया गया था. इसके चलते पैसों की तंगी आई और फिल्म का काम कई बार रोका गया. तब जाकर 15 साल में ये फिल्म बनकर तैयार हुई थी.
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हाल ही में मशहूर स्क्रीनराइटर कमलेश पांडेय ने इस फिल्म के निर्माण से जुड़ी कुछ बातें शेयर की हैं. उनकी मानें तो फिल्म में पहले किसी और को कास्ट किया गया था. उनके मुताबिक फिल्म में पहले नरगिस को अनारकली के लिए चुना गया था. इसके अलावा राजकुमार केसवानी की किताब ‘मुगल-ए-आजम’ (Mughal-E-Azam) में इस बारे में काफी डिटेल्स में लिखा गया है.
वहीं चंद्र मोहन अकबर और सप्रू सलीम के रोल में थे. फिल्म की शूटिंग पर काम चल रहा था, लेकिन देश के बंटवारे बाद सिचुएशन कुछ और ही हो गई और फिल्म के प्रोड्यूसर शिराज अली हकीम पाकिस्तान चले गए और चंद्र मोहन का निधन हो गया.लेकिन के. आसिफ ने हार नहीं मानी.
इस फिल्म के लिए शुरुआत में अनारकली के किरदार के लिए नरगिस पहली पसंद थीं. दूसरी ओर अकबर के रोल में चंद्र मोहन और सलीम के किरदार में सप्रू नजर आने वाले थे.
कमलेश ने खुलासा किया कि फिल्म में पहले अनारकली के रोल नरगिस नजर आने वाली थीं. लेकिन अपनी मां की वजह से उन्होंने इस ब्लॉकबस्टर को रिजेक्ट कर दिया, क्योंकि वह दिलीप कुमार के साथ काम नहीं करना चाहती थीं.नूतन को भी फिल्म के लिए ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने भी मना कर दिया.
बाद में जाकर ये रोल मधुबाला की झोली में गिरा. उनके पिता अताउल्लाह खान ने भी इस फिल्म से पहले कई शर्तें थीं, कि बाहर कहीं शूटिंग के लिए नहीं जाएंगे और शाम 6 बजे तक ही शूटिंग होगी. लेकिन बाद में देखते ही देखते सब कुछ ठीक होता चला गया और ये फिल्म और इसके किरदार अमर हो गए.
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