Friday, 17 April 2026
ADVERTISEMENT SPACE (728x90)
Breaking News
Welcome to HindiNewsPro - The premium destination for live news updates. | India launches new satellite. | Gold prices drop slightly today.
Share
Blog

रिजेक्टेड ट्यून पर बना वो कालजयी सॉन्ग, मोहम्मद रफी ने मखमली आवाज से कर दिया अमर, मालामाल हुए मेकर्स


Last Updated:

Mohammed Rafi Filmfare Award Winning Song : जिस ट्यून को प्रोड्यूसर ने रिजेक्ट कर दिया हो, फिल्म में रखने के लायक ना समझा हो, उसे कचरा समझकर निकाल दिया हो लेकिन उसी धुन पर बने गाने ने बॉलीवुड के लीजेंड सिंगर मोहम्मद रफी को फिल्मफेयर अवॉर्ड दिला दिया. संगीतकार जोड़ी ने डरते-डरते इस ट्यून को रफी साहब को सुनाया था. रफी साहब ने गाना रिकॉर्ड करने के लिए कहा. यह भी कहा कि अगर गाना नहीं चला तो इसका पूरा खर्चा वो खुद देंगे. फिल्म जब रिलीज हुई तो यही गाना सबसे ज्यादा पॉप्युलर हुआ. आज भी यह गाना टूटे दिल आशिकों के लवों पर रहता है. वो गाना कौन सा था, और फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं…….

साल था 1964. प्रोड्यूसर ताराचंद बड़जात्या ‘दोस्ती’ फिल्म बना रहे थे. म्यूजिक का जिम्मा युवा संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को दे रखा था. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने 1963 में आई फिल्म ‘पारसमणि’ से अपने करियर की शुरुआत की थी. ‘हंसता हुआ नूरानी चेहरा’ सॉन्ग खूब पॉप्युलर हुआ था. दोनों करियर शुरू ही कर रहे थे. दोस्ती फिल्म का डायरेक्शन सत्येन बोस ने किया था. प्रोड्यूसर ताराचंद चंद ने धुनें सिलेक्ट कर लीं मगर एक ट्यून रिजेक्ट कर दी. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को वो धुन बहुत पसंद थी. दोनों ने पूरा किस्सा मोहम्मद रफी को बताया. रफी साहब ने धुन सुनी तो गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी को गाना लिखने को कहा. मोहम्मद रफी ने गाने का पूरा खर्च उठाने की बात कही. गाना रिकॉर्ड हुआ और इस गाने के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.

हम 1964 की सुपरहिट फिल्म ‘दोस्ती’ के गाने ‘चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे, फिर भी कभी मैं नाम को तेरे, आवाज मैं ना दूंगा’ की बात कर रहे हैं. दोस्ती फिल्म का निर्माण राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले किया गया था. पहले इस फिल्म में संगीतकार रोशन को म्यूजिक देना था लेकिन वो किसी वजह से फिल्म का हिस्सा नहीं बन पाए. फिर न्यूकमर्स लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को यह फिल्म मिली. दोनों ने दिन-रात एक करके फिल्म का म्यूजिक कंपोज किया. प्रोड्यूसर ताराचंद बड़जात्या ने कई धुनें रिजेक्ट कर दी थीं.

ऐसे में उन्होंने रफी साहब की शरण ली. उन्हें सभी धुनें सुनाईं लेकिन जान-बूझकर एक धुन छुपा ली. रफी साहब ने सब गाने पसंद कर लिए. फिर डरते-डरते लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने रफी साहब से कहा कि एक और धुन है जिसे प्रोड्यूसर ने तो रिजेक्ट कर दिया है लेकिन आप अपनी राय दे दीजिए. रफी साहब ने वो रिजेक्टेड धुन सुनी तो उनकी आंखों में चमक आ गई. उन्होंने गाने को तत्काल रिकॉर्ड करने के लिए कहा. यह भी कहा कि यह गाना इतिहास रचेगा. हुआ भी ठीक ऐसा ही.

Add News18 as
Preferred Source on Google

रफी साहब ने प्रोड्यूसर ताराचंद बड़जात्या से बात की. कहा कि अगर ‘चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे’ गाना नहीं चला तो इसके प्रोडक्शन का पूरा खर्चा मैं वहन करूंगा. आपको जानकर हैरानी होगी कि रफी साहब ने इस फिल्म के सभी गानों के लिए सिर्फ 1 रुपये टोकन फीस ली थी. फिल्म में 5 गाने रफी साहब सोलो थे. एक गाना लता मंगेशकर ने गाया था.

दोस्ती फिल्म में कुल 6 गाने थे. हर गाना सुपरहिट था. इन सुपरहिट गानों में ‘चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे’, ‘मेरा तो जो भी कदम है’, ‘कोई जब राह ना पाए’, ‘राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती है’, ‘जानेवालो जरा मुड़के देखो मुझे’ और ‘गुड़िया हमसे रूठी रहोगी’ जैसे गाने शामिल थे. दोस्ती फिल्म को 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. फिल्म को बेस्ट फिल्म (ताराचंद बड़जात्या) , बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर (लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल), बेस्ट स्टोरी (बाण भट्ट)‌, बेस्ट डायलॉग (गोविंद मुनीस), बेस्ट प्लेबैक सिंगर (मोहम्मद रफी, चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे), और बेस्ट लिरिसिस्ट (मजरूह सुल्तानपुरी) का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

दोस्ती फिल्म दो लड़कों की दोस्ती की कहानी पर बेस्ड थी. एक अंधा है तो दूसरा दिव्यांग. ये किरदार सुधीर कुमार सावंत और सुशील कुमार सोम्या ने निभाए थे. फिल्म में संजय खान, फरीदा दादी, नाना पल्सीकर और लीला मिश्रा अहम भूमिकाओं में थीं. सुशील और सुधीर दोनों इस फिल्म के बाद रातोंरात स्टार बन गए लेकिन दोनों का करियर कुछ खास नहीं चला. ताराचंद बड़जात्या ने इस फिल्म के बाद सुशील-सुधीर कुमार के साथ तीन साल का मंथली सैलरी पर बेस्ड कॉन्ट्रैक्ट भी किया था लेकिन यह अनुबंध जल्द ही टूट गया.

‘दोस्ती’ फिल्म 1959 की बंगाली मूवी ‘लालू भुलू’ का रीमेक थी. ताराचंद ब‌ड़जात्या ने ओरिजनल फिल्म कोलकाता में देखी तो प्रोड्यूसर दीपकचंदई ककारिया से इसका रीमेक हिंदी में बनाने को कहा. दोस्ती फिल्म में पॉमेरियन डॉग का बहुत ही स्वीट रोल था. दिलचस्प बात यह है कि राजश्री प्रोडक्शन की 1994 की फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ में भी पॉमेरियन टफी का इसी तरह का रोल था.

पंचम दा और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल में गहरी दोस्ती थी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि आरडी बर्मन ने फिल्म के सभी गीतों में माउथ ऑर्गन बजाया. वो अपना काम छोड़कर रोज एक घंटे के लिए लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के पास रिकॉर्डिंग के लिए आया करते थे. म्यूजिक पीस बनाते थे.

दोस्ती फिल्म 1964 की टॉप टेन फिल्म में शुमार है. यह फिल्म कमाई के मामले में तीसरे नंबर पर थी. फिल्म एक साथ 90 प्रिंट के साथ रिलीज की गई थी जो उस दौर में बहुत बड़ी बात थी. फिल्म को सुपरहिट बनाने में इसके कर्णप्रिय म्यूजिक का बहुत बड़ा हाथ था. 90 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब 2 करोड़ का नेट कलेक्शन किया था. बॉक्स ऑफिस पर यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

Newswahni

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *