Friday, 17 April 2026
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फ्लॉप होनी थी अमिताभ बच्चन की फिल्म, सिर्फ एक एक्शन सीन ने पलटी बाजी, अंधाधुंध छापे पैसे


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Amitabh Bachchan 1970s Superhit Movie : ‘दीवार’ और ‘शोले’ जैसी कालजयी फिल्मों की कामयाबी के बाद अमिताभ बच्चन ने बॉलीवुड में अपना स्टारडम पूरी तरह से स्थापित कर लिया था. उनकी फीस भी हर नई फिल्म के साथ बढ़ती जा रही थी. फिर एक ऐसी फिल्म उन्हें ऑफर हुई जिसकी कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी. कहानी रिवेंज पर बेस्ड थी. अमिताभ बच्चन लीड रोल में थे. फिल्म का निर्देशन यश चोपड़ा करने जा रहे थे. अमिताभ के सितारे सातवें आसमान पर थे. कोई उन्हें टक्कर देने की स्थिति में नहीं था मगर जब प्रोड्यूसर ने इस फिल्म के लिए दूसरे हीरो से बात की तो उन्होंने अपनी शर्तों पर अमिताभ से ज्यादा फीस ली. मूवी ने रिलीज होते ही तहलका मचा दिया. वो एक्टर कौन था और फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं…..

बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता संजीव कुमार लंदन में अपनी छुट्टियां बता रहे थे. इसी बीच उनके पास प्रोड्यूसर गुलशन राय का कॉल आया. गुलशन ने बताया कि वो अगली फिल्म सलीम-जावेद के साथ बना रहे हैं. फिल्म का निर्देशन यश चोपड़ा करेंगे. फिल्म में अमिताभ बच्चन लीड रोल में होंगे. आप उनके पिता की भूमिका निभाएंगे. हरि भाई यानी संजीव कुमार ने फिल्म के लिए हामी तो भर दी लेकिन सबसे ज्यादा फीस लेने की डिमांड सामने रख दी. संजीव कुमार ने उस जमाने में 12 लाख रुपये मांगे थे. डिमांड सुनकर गुलशन राय सन्न रह गए. उन्होंने शर्त पूरी की और जब फिल्म बनकर रिलीज हुई तो बॉक्स ऑफिस पर भूचाल आ गया. हम मई 1978 में रिलीज हुई ‘त्रिशूल’ फिल्म की बात कर रहे हैं.

अमिताभ बच्चन से ज्यादा फीस लेने की बात सुनकर संजीव कुमार के दोस्त भी हैरान रह गए थे. इस पर जवाब देते हुए संजीव कुमार ने कहा था, ‘मेरी फीस बिल्कुल जायज है. अमिताभ नंबर वन स्टार होंगे लेकिन इंडस्ट्री में मुझसे बड़ा बाप आज के समय में कोई नहीं. जिसे मेरी जरूरत होगी, वो यह फीस देगा.’ संजीव कुमार की बॉयोग्राफी लिखने वाले हनीफ झावेरी ने हाल ही में इसका खुलासा किया था. संजीव कुमार की भांजी जिगना शाह ने भी इसकी पुष्टि की. उन्होंने बताया कि संजीव कुमार और विक्रम भट्ट दोस्त थे. संजीव कुमार ने उन्हें पूरी बात बताई थी.

संजीव कुमार ने इस फिल्म के लिए 12 लाख रुपये चार्ज किए थे, वहीं अमिताभ बच्चन को 9 लाख रुपये मिले थे. बताया जाता है कि संजीव कुमार को यह पता चल चुका था कि दिलीप कुमार अमिताभ के पिता का रोल ठुकरा चुके हैं. उन दिनों संजीव कुमार और दिलीप कुमार के बीच कोल्ड वॉर भी चल रहा था.

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संजीव कुमार 1975 में आई कालजयी फिल्म ‘शोले’ में ठाकुर के रोल में सब पर भारी पड़े थे. उनकी फीस पहले से ही बढ़ी हुई थी. अब वो लीड हीरो से ज्याद फीस की डिमांड कर रहे थे. ‘त्रिशूल’ के प्रोड्यूसर गुलशन राय भी पशोपेश में पड़ गए थे.

सलीम-जावेद ने गुलशन राय से कहा कि इस रोल के साथ संजीव कुमार ही न्याय कर पाएंगे. फिल्म की कहानी बाप-बेटे की जरूर थी लेकिन इसमें रिवेंज, रिश्तों का टकराव और अहंकार जैसे कई शॉकिंग वैल्यू वाले एलिमेंट जोड़े गए थे. स्क्रिप्ट राइटर सलीम-जावेद ने फिल्म का बेसिक आइडिया 1968 में आई धर्मेंद्र-तनूजा-जयललिता की फिल्म ‘इज्जत’ से उठाया था.

सलीम-जावेद ने स्टोरी सबसे पहले जीतेंद्र को सुनाई थी. फिर स्क्रिप्ट राजेंद्र कुमार के पास पहुंची. इस स्क्रिप्ट पर राजेंद्र कुमार-जीतेंद्र दोनों ही फिल्म बनाना चाहते थे. अंत में इसे गुलशन राय ने प्रोड्यूस किया और डायरेक्शन का जिम्मा यश चोपड़ा ने संभाला था.

त्रिशूल फिल्म का प्रीमियर देखकर प्रोड्यूसर गुलशन राय खासे निराश हुए थे. उन्होंने फिल्म को बचाने का तरीका पूछा सलीम-जावेद से पूछा. यश चोपड़ा ने दोनों के साथ मिलकर 45 दिन की शूटिंग फिर से की. इस बार फिल्म में अमिताभ बच्चन के एंबुलेंस सीन डाले गए. ये सीन्स फिल्म के टर्निंग प्वॉइंट बन गए. बदले की कहानी वाली इस फिल्म में कॉरपोरेट की मीटिंग, टेंडर प्रकिया, बिजनेस मीटिंग दिखाया गया. यह सब्जेक्ट हिंदी सिनेमा में बिल्कुल नया था. अमिताभ बच्चन का एक डायलॉग ‘और आप मिस्टर आरके गुप्ता, आप मेरे नाजायज बाप हैं’ दर्शकों को खूब पसंद आया.

त्रिशूल का म्यूजिक खय्याम ने कंपोज किया था. सुरीली धुनों पर गीतकार साहिर लुधियानवी ने गीत लिखे थे. फिल्म के ज्यादातर गानों में किशोर कुमार-लता मंगेशकर की आवाज में थे. किशोर कुमार के गाने ‘मोहब्बत बड़े काम की चीज है’, ‘जानेमन तुम कमाल करती हो’ आज भी हिट हैं. फिल्म कई लिहाज से मॉर्डन थी. कॉरपोरेट में जॉब करती महिलाएं, शशि कपूर विदेश से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन का कोर्स करके इंडिया लौटते हैं. वो एक जगह पर राखी को कंप्यूटर कहते हैं. यह सब टर्म उस दौर की फिल्म में नए थे.

फिल्म में वहीदा रहमान ने अमिताभ बच्चन की मां का रोल निभाया था. हालांकि दोनों का साथ में कोई सीन नहीं था. संजीव कुमार-वहीदा रहमान का कैरेक्टर बहुत ही मॉडर्न था. दोनों के बीच शादी किए पत्नी-पत्नी जैसे रिश्ता बन गया था. फिल्म के गीतकार साहिर लुधियानवी की निजी जिंदगी की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी. वो अपनी मां से प्यार जबकि पिता से नफरत करते थे. फिल्म में अमिताभ बच्चन ने नाजायद औलाद का किरदार निभाया. वो अपने पिता के बिजनेस को किसी भी कीमत पर बर्बाद कर देना चाहते थे. फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी.

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