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हिंदी सिनेमा का इतिहास जब भी संगीत की बात करता है, तो कुछ आवाजें ऐसी हैं जो समय की सीमाओं से परे जाकर अमर हो जाती हैं. 50 से 80 के दशक के बीच का दौर ऐसा था, जब रेडियो पर बजते गीत सीधे दिल में उतर जाते थे. ‘रूप तेरा मस्ताना’, ‘मेरे सपनों की रानी’, ‘पल पल दिल के पास’ जैसे गीतों ने संगीत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. इन गानों की खास बात सिर्फ धुन या बोल नहीं थे, बल्कि वह आवाज थी जिसने इन्हें जादुई बना दिया. वो आवाज थी किशोर कुमार की.
नई दिल्ली. किशोर कुमार की आवाज… एक ऐसा जादू, जिसने हिंदी सिनेमा के कई सितारों को सुपरस्टार बना दिया. उनके बारे में कहा जाता था कि फिल्मों में पहले किशोर दा को साइन किया जाता था, फिर हीरो का चुनाव होता था. उनकी इसी आवाज के दम पर देव आनंद, राजेश खन्ना, जितेंद्र, अमिताभ बच्चन और मिथुन चक्रवर्ती जैसे कई सितारों को सुपरस्टार का दर्जा दिलवाया. किशोर कुमार सिर्फ एक सिंगर नहीं थे, बल्कि एक ऐसा दौर थे, जिसने बॉलीवुड के कई सुपरस्टार्स की पहचान गढ़ी. अपने लगभग चार दशक लंबे करियर में उन्होंने 1,198 फिल्मों में 2,600 से ज्यादा गाने गाए, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. शुरुआत में किशोर दा केवल अपने लिए गाते थे और उन्होंने खुद पर फिल्माए जाने वाले 242 से ज्यादा गाने गाए.
लेकिन समय के साथ हालात बदले और उन्होंने प्लेबैक सिंगिंग की ओर रुख किया. साल 1948 में फिल्म जिद्दी के लिए उन्होंने पहली बार देव आनंद के लिए गाना गाया. यहीं से एक ऐसी जोड़ी की शुरुआत हुई, जिसने आने वाले सालों में इतिहास रच दिया. देव आनंद की रोमांटिक और स्टाइलिश इमेज के पीछे किशोर कुमार की आवाज का बहुत बड़ा योगदान था.
‘मरने की दुआएं क्यों मांगू’ से शुरू हुआ यह सफर लगभग 20 सालों तक चला. इस दौरान उन्होंने देव आनंद के अलावा किसी और के लिए नहीं गाया. ‘जीवन के सफर में राही’ (मुनिमजी, 1955), ‘हम हैं राही प्यार के’ (नौ दो ग्यारह, 1957) और ‘पन्ना की तमन्ना है’ (हीरा पन्ना, 1973) जैसे गीतों ने देव आनंद के ‘चॉकलेटी हीरो’ वाले इमेज को मजबूत किया. किशोर कुमार ने साल 1898 में ‘सच्चे का बोल बाला’ में भीदेव आनंद के लिए आखिरी बार गाया.
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शुरुआती दिनों में किशोर कुमार मुख्य रूप से देव आनंद और खुद के लिए ही गाते थे. लेकिन 1969 में आई फिल्म आराधना ने सब कुछ बदल दिया. इस फिल्म के गानों की सफलता ने किशोर कुमार को इंडस्ट्री का सबसे मांग वाला सिंगर बना दिया. कहा जाता है कि इसके बाद कई हीरो और प्रोड्यूसर्स की पहली पसंद किशोर कुमार ही बन गए थे. यहां तक कि कई कलाकार फिल्म साइन करने से पहले यह शर्त रखते थे कि उनके लिए गाना किशोर दा ही गाएंगे. राजेश खन्ना के सुपरस्टार बनने में किशोर कुमार की आवाज का अहम योगदान माना जाता है. ‘मेरे सपनों की रानी’ और ‘ये शाम मस्तानी’ जैसे गीतों ने राजेश खन्ना की रोमांटिक इमेज को नई ऊंचाई दी. ‘आराधना’, ‘कटी पतंग’, ‘दो रास्ते’, ‘अनुराग’ और ‘आप की कसम’ जैसे गानों ने उन्हें ‘फर्स्ट सुपरस्टार’ का खिताब दिलाया.
जितेंद्र की ‘जंपिंग जैक’ की इमेज किशोर दा के गानों से बनी. ‘जॉनी’, ‘फरिश्ता’, ‘धरम वीर’ और ‘उधार का सिंदूर’ जैसे डांस नंबर्स में उनकी जोड़ी कमाल की थी.<br />जितेंद्र के लिए किशोर कुमार ने कई यादगार गाने गाए. ‘हिम्मतवाला’ (1983) में ‘ताकी ओ ताकी’ और ‘नैनो में सपना’ जैसे गीतों ने जितेंद्र के ‘जंपिंग जैक’ इमेज को मजबूत किया. संगीतकार बप्पी लाहिड़ी के साथ उनकी जोड़ी ने कई हिट गाने दिए. इससे पहले किशोर दा ने जितेंद्र के लिए ‘मुसाफिर हूं यारों’ (परिचय, 1972) और ‘जाने क्या सोच कर’ (किनारा, 1977) जैसे संगीतमय गीत भी गाए थे. 1980 के दशक में किशोर दा की आवाज के बिना जितेंद्र की फिल्मों की कल्पना मुश्किल थी.
अमिताभ बच्चन को सुपरस्टार बनाने में किशोर कुमार की आवाज का अहम योगदान रहा. ‘डॉन’ का ‘खाइके पान बनारस वाला’ आज भी पार्टी सॉन्ग में शुमार है. अमिताभ ने खुद ट्वीट कर बताया कि किशोर दा ने उनकी 60 से अधिक फिल्मों में 130 से ज्यादा गाने गाए. फिल्मफेयर अवार्ड में किशोर दा को 8 बार सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्वगायक का पुरस्कार मिला, जिनमें से तीन उन्होंने अमिताभ के लिए गाए: ‘मंजिलें अपनी जगह है’ (शराबी), ‘पाग घुंगरू बांध’ (नमक हलाल) और ‘खाइके पान बनारस वाला’ (डॉन). ‘दिलबर मेरे’ (सत्ते पे सत्ता), ‘देखा एक ख्वाब’ (सिलसिला) और ‘रिमझिम गिरे सावन’ (मिली) जैसे गीतों ने अमिताभ के ‘रोमांटिक’ और ‘एंग्री यंग मैन’ दोनों वाले इमेज को निखारा.
मिथुन चक्रवर्ती के करियर का सबसे बड़ा मोड़ 1982 में आई ‘डिस्को डांसर’ थी. ‘आय ओह आ जरा मुड़के’ और ‘जिमी जिमी’ जैसे गानों में किशोर दा की आवाज ने मिथुन को ‘डिस्को स्टार’ बना दिया. ‘पतिता’ (1980) में ‘होठों पे जान चली आएगी’ और ‘आमने-सामने’ (1982) में ‘मैंने कहा था मैं आऊंगा’ जैसे गीतों ने मिथुन के रोमांटिक इमेज को मजबूत किया. किशोर दा की आवाज के बिना 1980 के दशक में मिथुन की फिल्मों की सफलता अधूरी थी.
किशोर कुमार ने सिर्फ इन सितारों के लिए ही नहीं, बल्कि शम्मी कपूर, ऋषि कपूर, विनोद खन्ना, धर्मेंद्र और संजय दत्त जैसे कई बड़े कलाकारों के लिए भी गाने गाए. उनकी आवाज इतनी बहुमुखी थी कि वह हर हीरो के व्यक्तित्व के हिसाब से खुद को ढाल लेते थे. कहा जाता है कि मिस्टर इंडिया के सफलता के बाद वह खुद अनिल कपूर उनके पास उनके लिए गाने गाने की सिफारिश लेकर गए थे.
किशोर कुमार की खासियत यही थी कि वह सिर्फ गाना नहीं गाते थे, बल्कि उसे जीते थे. उनकी आवाज में भावनाओं की ऐसी गहराई थी, जो सीधे दर्शकों के दिल तक पहुंचती थी. यही वजह है कि जिस हीरो के लिए उन्होंने गाना गाया, उसकी लोकप्रियता कई गुना बढ़ गई. आज भी, जब संगीत का दौर बदल चुका है और रीमिक्स का चलन बढ़ गया है, तब भी किशोर कुमार के गानों की लोकप्रियता कम नहीं हुई है. उनकी आवाज आज भी उतनी ही ताजा और असरदार लगती है, जितनी उस दौर में थी. किशोर कुमार सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की आत्मा थे. उनकी आवाज ने न जाने कितने सितारों को सुपरस्टार बनाया और यही वजह है कि उन्हें बॉलीवुड का सबसे प्रभावशाली प्लेबैक सिंगर माना जाता है.
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