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आमिर खान को अक्सर बॉलीवुड में एक आइडियलिस्टिक हीरो के तौर पर देखा जाता है, लेकिन उनके करियर में एक ऐसा डार्क चैप्टर भी है जिसने सिनेमा लवर्स को हैरान कर दिया. आमिर ने बार-बार अपनी सेफ इमेज को चैलेंज किया है और ऐसे ग्रे-शेड वाले कैरेक्टर्स किए हैं, जो न सिर्फ डरावने थे बल्कि बहुत इमोशनल भी थे. ‘फना’ में रेडिकल रेहान से लेकर ‘तलाश’ के रोंगटे खड़े कर देने वाले फिनाले तक, आमिर ने साबित कर दिया कि वह बुराई के साये को भी पूरी परफेक्शन के साथ दिखा सकते हैं.
नई दिल्ली. आमिर खान का सिनेमाई सफर हमेशा एक्सपेरिमेंट से भरा रहा है. जब उनके कंटेंपरेरी एक्टर्स अपनी लार्जर-दैन-लाइफ हीरो इमेज को बनाए रखने में बिजी थे, आमिर ने 1989 में ही डार्क फिल्म ‘राख’ से यह साफ कर दिया था कि वह एक ऐसे परफॉर्मर हैं जो लीक से हटकर काम करते हैं. आमिर के लिए विलेन या ‘ग्रे शेड’ का रोल सिर्फ गोलियां चलाने या दहाड़ने के बारे में नहीं है, बल्कि कैरेक्टर के मानसिक उथल-पुथल को स्क्रीन पर जीने के बारे में है.
1. फना (2006): ‘फना’ में आमिर खान ने रेहान कादरी का रोल किया था. फिल्म के पहले हाफ में, वह एक फ्लर्ट करने वाले, कविता सुनाने वाले गाइड के तौर पर दिखते हैं, जिसे एक अंधी लड़की (काजोल) से प्यार हो जाता है, लेकिन इंटरवल के बाद आमिर का जो साइड सामने आता है, वह डरावना है. रेहान एक टेररिस्ट है, जो अपना मिशन पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. वह अपने ससुर को मार देता है और देश को खतरे में डाल देता है. आमिर ने एक ऐसे पिता और पति का रोल किया जो अपने परिवार से प्यार करता है, लेकिन उसका ‘धर्म’ और ‘मकसद’ उसे विलेन बना देता है.
2. अर्थ (1999): आमिर खान ने दीपा मेहता की फिल्म ‘अर्थ’ में दिल नवाज (आइस कैंडी मैन) का रोल किया था. यह उनके करियर की सबसे कम आंकी गई लेकिन दमदार नेगेटिव परफॉर्मेंस में से एक है. आमिर ने बहुत अच्छे से दिखाया कि कैसे बंटवारे के दौरान एक मिलनसार आदमी सांप्रदायिक आग में जलकर जानवर बन जाता है. जब वह फिल्म के आखिर में अपने ही दोस्त और गर्लफ्रेंड को धोखा देता है, तो दर्शक उससे नफरत करने पर मजबूर हो जाते हैं. यह किरदार दिखाता है कि कैसे हालात एक आम आदमी के अंदर के विलेन को जगा सकते हैं.
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3. धूम 3 (2013): ‘धूम 3’ में आमिर ने डबल रोल किया था- साहिर और समर. हालांकि यह एक बड़ी कमर्शियल फिल्म थी, लेकिन इसका हीरो एक क्रिमिनल था. साहिर का किरदार एक ‘एंटी-हीरो’ का है. वह एक बैंक लूटता है और पुलिस से बच निकलता है. उसका मकसद अपने पिता की मौत का बदला लेना है, लेकिन कानून की नजर में वह एक विलेन है. आमिर खान ने इस किरदार में जो गंभीरता और कड़वाहट दिखाई, उसने इसे धूम सीरीज का सबसे डार्क किरदार बना दिया.
4. राख (1989): अपने करियर की शुरुआत में आमिर ने राख जैसी फिल्म चुनी, जो पूरी तरह से डार्क थ्रिलर थी. इस फिल्म में वह एक ऐसे लड़के का रोल करते हैं, जो अपने दोस्त के गैंग रेप का बदला लेने के लिए मर्डरर बन जाता है. फिल्म में कोई ‘हीरो’ नहीं है, यह बस एक लड़का है जो सिस्टम से हारकर खुद क्रिमिनल बन जाता है. इस फिल्म में आमिर के चेहरे पर जो खालीपन और हिंसा दिखी, उसने दुनिया को पहली बार उनके ‘ग्रे-शेडेड’ टैलेंट से मिलवाया.
5. तलाश (2012): लिस्ट में पांचवें नंबर पर ‘तलाश’ है, जिसने 2012 में रिलीज होते ही तहलका मचा दिया था. आमिर खान ने इंस्पेक्टर सुरजन सिंह शेखावत का रोल किया था, जो अपने बेटे की मौत का दुख मना रहा है. फिल्म की पूरी कहानी एक रहस्यमयी एक्सीडेंट के इर्द-गिर्द घूमती है. आमिर खान रोजी (करीना कपूर) से मिलते हैं, जो केस सॉल्व करने में उनकी मदद करती है. पूरी फिल्म में ऑडियंस और खुद आमिर का कैरेक्टर रोजी को एक सेक्स वर्कर मानता है, लेकिन फिल्म के क्लाइमैक्स ने सभी को चौंका दिया.
आखिरी सीन में पता चलता है कि रोजी नाम की कोई असली लड़की नहीं है. असल में, करीना कपूर एक ‘आत्मा’ थीं जिनकी मौत उसी जगह हुई थी जहां आमिर केस की इन्वेस्टिगेशन कर रहे थे. यही आत्मा आमिर को इंसाफ दिलाने के लिए सुराग दे रही थी. इस फिल्म में आमिर का कैरेक्टर इतना मेंटली अनस्टेबल और डिप्रेस्ड है कि वह अक्सर गलत फैसले लेता है. अपनी पत्नी (रानी मुखर्जी) से उसकी दूरी और एक ‘आत्मा’ से उसका कनेक्शन इस फिल्म को बहुत डार्क और सुपरनैचुरल एक्सपीरियंस बनाता है. जिस तरह से आमिर ने एक टूटे हुए आदमी के ‘ग्रे’ पहलुओं को दिखाया है, वह कभी न भूलने वाला है
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