Sunday, 26 April 2026
ADVERTISEMENT SPACE (728x90)
Breaking News
Welcome to HindiNewsPro - The premium destination for live news updates. | India launches new satellite. | Gold prices drop slightly today.
Share
Blog

इंडिया का वो क्रिकेटर, ‘शोले’ में यादगार रोल निभाकर हुआ अमर, आज भी रोंगटे खड़े कर देता है 1 डायलॉग


Last Updated:

एक्टर को दुनिया ‘शोले’ में निभाए यादगार किरदार से जानती है. मगर वह मुंबई एक क्रिकेटर बनने का सपना लेकर आए थे. वे उत्तर प्रदेश की क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे थे. उन्होंने तंगहाली के चलते थिएटर जॉइन किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने करीब 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और एक कालजयी डायलॉग से अमर हो गए. उन्होंने विदेशी फिल्मों में भी अभिनय किया. लंबी बीमारी के बाद 10 मई 2010 को महान एक्टर का निधन हो गया.

नई दिल्ली: मशहूर एक्टर की कहानी उस मुसाफिर जैसी है जो निकला तो किसी और मंजिल के लिए था, लेकिन तकदीर ने उसे बॉलीवुड के ऊंचे मुकाम पर पहुंचा दिया. आज भले ही दुनिया उन्हें ‘शोले’ से जानती हो, पर बहुत कम लोग जानते हैं कि इस कलाकार की आंखों में कभी सिल्वर स्क्रीन की चमक नहीं, बल्कि क्रिकेटर बनने का सपना बसता था.(फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)

मैक मोहन का जन्म 24 अप्रैल 1938 को कराची में हुआ था और उनका असली नाम मोहन माखीजानी था. उनके पिता ब्रिटिश आर्मी में कर्नल थे, जिनका तबादला 1940 में लखनऊ हो गया. मैक मोहन की शुरुआती परवरिश और पढ़ाई नवाबों के शहर लखनऊ में ही हुई, जहां उन्होंने पहली बार बड़े होकर कुछ बनने के ख्वाब देखना शुरू किया था. (फोटो साभार: Instagram@manjarimakijany)

लखनऊ की गलियों में बड़े होते हुए उनका दिल क्रिकेट के लिए धड़कता था. वे एक प्रोफेशनल क्रिकेटर बनने के लिए इस कदर जुनूनी थे कि उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर उत्तर प्रदेश की स्टेट टीम में अपनी जगह बना ली थी. उस वक्त उनके जेहन में एक्टिंग का दूर-दूर तक कोई ख्याल नहीं था, वे बस मैदान पर चौके-छक्के जड़ना चाहते थे. (फोटो साभार: Instagram@filmhistorypics)

Add News18 as
Preferred Source on Google

साल 1952 में क्रिकेट की बारीकियां सीखने की उम्मीद के साथ मैक मोहन सपनों की नगरी मुंबई पहुंचे. मुंबई आने का मकसद सिर्फ खेल था, लेकिन समंदर किनारे बसे इस शहर की हवा में कुछ और ही जादू था. यहां आकर वे रंगमंच और नाटकों के संपर्क में आए और अनजाने में ही अभिनय की दुनिया उन्हें अपनी ओर खींचने लगी.(फोटो साभार: IMDb)

कहते हैं कि जरूरत इंसान से क्या कुछ नहीं करवाती. मुंबई में गुजारे के लिए मैक मोहन को पैसों की सख्त जरूरत थी, जिसके चलते उन्होंने शौकत कैफी के एक नाटक के लिए ऑडिशन दिया. किस्मत ने साथ दिया और उन्हें काम मिल गया. बस यहीं से उनके भीतर का कलाकार जाग उठा और उन्होंने क्रिकेट छोड़ पुणे के फिल्म संस्थान से एक्टिंग की बारीकियां सीखीं. (फोटो साभार: Instagram@cinemaajkal)

1964 में फिल्म ‘हकीकत’ से बॉलीवुड में कदम रखने के बाद मैक मोहन ने कई छोटी-बड़ी फिल्में कीं, लेकिन 1975 की ‘शोले’ ने इतिहास रच दिया. गब्बर ने पूछा- ‘अरे ओ सांभा, कितना इनाम रखे है रे सरकार हम पर?’ मैक मोहन का एक लाइन का जवाब आया- ‘पूरे पचास हजार’. यह डायलॉग उन्हें भारतीय सिनेमा के पन्नों में हमेशा के लिए अमर कर गया. (फोटो साभार: IMDb)

मैक मोहन की खासियत यह थी कि वे सिर्फ हिंदी सिनेमा तक सीमित नहीं रहे. उन्होंने भोजपुरी, गुजराती, पंजाबी और मराठी समेत कई भारतीय भाषाओं में काम किया. इतना ही नहीं, उनका टैलेंट सात समंदर पार भी चमका. उन्होंने अंग्रेजी, रूसी और स्पेनिश फिल्मों में भी अपनी अदाकारी के जौहर दिखाए. उन्होंने अपने पूरे करियर में लगभग 200 से ज्यादा फिल्में कीं. (फोटो साभार: Instagram@tarangan_mandar_joshi)

मैक मोहन के लिए जिंदगी का आखिरी सफर काफी स्ट्रगल से भरा था. वे साल 2010 में जब फिल्म ‘अतिथि तुम कब जाओगे’ की शूटिंग कर रहे थे, तभी उनकी तबीयत खराब हुई और फेफड़ों के कैंसर का पता चला. आखिरकार 10 मई 2010 को भारतीय सिनेमा का यह चमकता सितारा दुनिया को अलविदा कह गया. ‘सांभा’ की उनकी इमेज आज भी हर फिल्म प्रेमी के दिल में जिंदा है. (फोटो साभार: Instagram@timelessindianmelodies)

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

Newswahni

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *