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Review: पूल में फंसी कहानी या दर्शक? सर्वाइवल के नाम पर बिजॉय नांबियार का उबाऊ प्रयोग है ‘तू या मैं’
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Review: पूल में फंसी कहानी या दर्शक? सर्वाइवल के नाम पर बिजॉय नांबियार का उबाऊ प्रयोग है ‘तू या मैं’
नई दिल्ली. अगर आप एक ऐसी फिल्म की तलाश में हैं जो आपको रोमांच के नाम पर केवल सिरदर्द दे, तो बिजॉय नांबियार की ‘तू या मैं’ आपके लिए ही बनी है. साल 2018 की थाई फिल्म ‘द पूल’ का यह आधिकारिक रीमेक बॉलीवुड की उस पुरानी बीमारी का शिकार है, जहां मेकर्स को लगता है कि किसी बेहतरीन विदेशी फिल्म की बस फोटोकॉपी कर देने से ही काम चल जाएगा. फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी सुस्त रफ्तार और कमजोर स्क्रिप्ट है. एक खाली स्विमिंग पूल में फंसी जिंदगी और मौत की इस जंग में न तो कहीं डर महसूस होता है और न ही किरदारों के प्रति सहानुभूति.
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