Friday, 17 April 2026
ADVERTISEMENT SPACE (728x90)
Breaking News
Welcome to HindiNewsPro - The premium destination for live news updates. | India launches new satellite. | Gold prices drop slightly today.
Share
Blog

आरके स्टूडियो की वो यादगार होली, जिसकी चमक के आगे फीकी हैं आज की पार्टियां, एक रंग में रंग जाती थी पूरी इंडस्ट्री


नई दिल्ली. जब बॉलीवुड में होली की बात होती है, तो सबसे पहला नाम जो जेहन में आता है, वह हैं राज कपूर. वो दौर कुछ और ही था, जब चेंबूर का आरके स्टूडियो सिर्फ एक फिल्म स्टूडियो नहीं, बल्कि खुशियों और रंगों का सबसे बड़ा ठिकाना बन जाता था. शोमैन राज कपूर की होली पार्टियां इतनी मशहूर थीं कि कहा जाता था कि अगर आपने आरके स्टूडियो की होली नहीं खेली, तो आप अभी बॉलीवुड के सितारे नहीं बने.

आरके स्टूडियो की इस मशहूर होली की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी. राज कपूर को रंगों और अपनों के साथ जश्न मनाने का बेहद शौक था. धीरे-धीरे यह एक निजी पार्टी से बढ़कर पूरी इंडस्ट्री का एक बड़ा जलसा बन गई. इस होली की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यहां कोई छोटा या बड़ा नहीं होता था. एक तरफ इंडस्ट्री के दिग्गज सितारे होते थे, तो दूसरी तरफ स्टूडियो के स्पॉटबॉय और टेक्नीशियन. सब एक ही रंग में रंगे नजर आते थे.

रंगों से भरी टंकी में हर किसी को लगानी पड़ती थी डुबकी

आरके स्टूडियो की होली में रंगों से भरी टंकी बात न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. स्टूडियो में रंगों से भरा एक बड़ा सा टब बनाया जाता था. परंपरा यह थी कि जो भी कलाकार या मेहमान आता, उसे सीधे उस टब में डुबकी लगवानी पड़ती थी. आरके स्टूडियो में होली में शालीनता भी थी और जबरदस्त मस्ती भी. वहां कोई बच नहीं सकता था. अगर कोई एक बार अंदर गया तो समझो रंगों से सराबोर होकर ही बाहर निकलता था. माहौल इतना अपनापन भरा होता था कि बड़े-बड़े स्टार्स भी जमीन पर बैठकर खाना खाते और ढोलक की थाप पर नाचते थे.

खाने-पीने का होता था शाही इंतजाम

इस पार्टी में खाने-पीने का शाही इंतजाम होता था. ठंडाई और भांग के साथ-साथ संगीत का ऐसा दौर चलता था कि शाम कब हो जाती, पता ही नहीं चलता. अमिताभ बच्चन, दिलीप कुमार, देव आनंद से लेकर हेमा मालिनी और रेखा तक, हर कोई यहां हाजिरी लगाना अपनी खुशनसीबी समझता था. सितारे सफेद कपड़ों में आते और कुछ ही मिनटों में पहचान में नहीं आते थे.

धीरे-धीरे फीकी पड़ गई होली की चमक

साल 1988 में राज कपूर के निधन के बाद इस परंपरा की चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी, हालांकि उनके बेटों रणधीर, ऋषि और राजीव कपूर ने कुछ सालों तक इसे जारी रखा, लेकिन राज कपूर जैसा जादू कहीं खो गया. आज बॉलीवुड में होली का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है.

क्यों अब वैसी होली नहीं दिखती?

अब वैसी ओपन हाउस पार्टियां नहीं होतीं. आज के दौर में पैपराजी और सोशल मीडिया के चलते सितारे अपनी प्राइवेसी को लेकर बहुत सतर्क रहते हैं. अब पार्टियां ब्रांड एंडोर्समेंट और पीआर एक्टिविटी का हिस्सा बन गई हैं, जिनमें वो पुराना अपनापन नजर नहीं आता. 2019 में आरके स्टूडियो के बिक जाने के बाद, उस ऐतिहासिक जमीन पर होली की यादें हमेशा के लिए दफन हो गईं.

पूरी फिल्म इंडस्ट्री को एक सूत्र में बांधती थी होली

आज भी जब होली आती है, तो पुराने कलाकार उस दौर को याद कर भावुक हो जाते हैं. राज कपूर की वो होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं थी, बल्कि वो पूरी फिल्म इंडस्ट्री को एक सूत्र में बांधने का जरिया थी. आज भी चेंबूर की गलियों में उस ढोलक की गूंज और शोमैन की वो हंसी याद की जाती है.



Source link

Newswahni

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *