43 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा
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खराब लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान और स्ट्रेस डाइजेशन को प्रभावित करते हैं। इससे एसिडिटी, कब्ज और अपच जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अगर ये दिक्कतें लगातार बनी रहें तो एनर्जी, काम करने की क्षमता और मूड तीनों प्रभावित होते हैं।
अमेरिकन ग्लोबल हेल्थकेयर कंपनी ‘एबॉट’ के ‘गट हेल्थ सर्वे’ के अनुसार, 22% भारतीय वयस्क कब्ज से परेशान रहते हैं। वहीं 13% गंभीर कब्ज की समस्या का सामना कर रहे हैं। ऐसे में डाइजेस्टिव हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी है।
इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि-
- हेल्दी डाइजेशन के लिए क्या करें?
- कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?
एक्सपर्ट:
डॉ. सुकृत सिंह सेठी, डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम
डॉ. अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली
सवाल- अच्छी सेहत के लिए डाइजेशन दुरुस्त रहना क्यों जरूरी है?
जवाब- अच्छी सेहत के लिए डाइजेशन दुरुस्त रहना सिर्फ जरूरी नहीं, बल्कि क्रिटिकल है। पॉइंटर्स से इसे समझते हैं-
अगर डाइजेस्टिव सिस्टम सही नहीं है, तो विटामिन, मिनरल, प्रोटीन और फैट का एब्जॉर्प्शन प्रभावित होता है। इससे कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। जैसे-
- लो एनर्जी
- लो इम्यूनिटी
- स्किन और बालों से जुड़ी समस्याएं
- हॉर्मोनल इंबैलेंस
इसके अलावा हमारे गट माइक्रोब्स इम्यून सिस्टम और ब्रेन हेल्थ से भी जुड़े होते हैं। यह ओवरऑल बॉडी फंक्शनिंग को प्रभावित करते हैं।
सवाल- क्या डाइजेशन का दुरुस्त रहना इस बात पर निर्भर है कि हमारी डाइट कैसी है?
जवाब- हां, सही डाइजेशन काफी हद तक डाइट पर निर्भर करता है। इसे ऐसे समझते हैं-
- हमारी डाइट सीधे माइक्रोबायोम (आंतों में रहने वाले गुड-बैड बैक्टीरिया) के स्ट्रक्चर को प्रभावित करती है।
- फाइबर-रिच फूड्स जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज प्रीबायोटिक की तरह काम करते हैं। यह गुड बैक्टीरिया बढ़ाते हैं।
- ये बैक्टीरिया शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (SCFAs) बनाते हैं। ये आंतों की प्रोटेक्शन लेयर को मजबूत करते हैं और इंफ्लेमेशन कम करते हैं। इससे डाइजेशन सुधरता है।
- संतुलित डाइट डाइजेस्टिव एंजाइम्स के सिक्रेशन को भी रेगुलेट करती है। इससे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट का ब्रेकडाउन अच्छे से होता है।

सवाल- डाइजेशन सिस्टम को दुरुस्त रखने का साइंटिफिक तरीका क्या है?
जवाब- इसके तीन हिस्से हैं-
1. लाइफस्टाइल
डाइजेशन पूरे शरीर के रिद्म और रूटीन से जुड़ा होता है। पॉइंटर्स से समझते हैं-
फिजिकल एक्टिविटी
- रेगुलर एक्सरसाइज आंतों के मूवमेंट को स्टिमुलेट करती है। इससे डाइजेशन बेहतर होता है।
- डाइजेशन ठीक रहने से कब्ज की समस्या भी कम होती है।
हाइड्रेशन
- पर्याप्त हाइड्रेशन से पाचन आसान होता है और डाइजेस्टिव एंजाइम्स बेहतर ढंग से काम करते हैं।
- पानी पेट और आंतों में बनने वाले डाइजेस्टिव जूस (ग्रैस्ट्रिक जूस) के सही सिक्रेशन को सपोर्ट करता है।
- पानी फाइबर के साथ मिलकर एक जेली पदार्थ बनाता है, जो स्टूल को सॉफ्ट करता है।
- अगर शरीर में पानी की कमी होगी तो पाचन धीमा पड़ सकता है। इससे कब्ज और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
2. माइंडफुल ईटिंग
खाने का तरीका भी फूड चॉइस जितना ही जरूरी है। इसे पॉइंटर्स से समझते हैं-
- जब धीरे-धीरे चबाकर खाते हैं तो शरीर ‘रेस्ट एंड डाइजेस्ट’ मोड में चला जाता है।
- इस अवस्था में लार, गैस्ट्रिक जूस और एंजाइम्स सही मात्रा में रिलीज होते हैं। इससे पाचन सुधरता है।
- जल्दबाजी में खाने से यह सिस्टम एक्टिव नहीं हो पाता है। इससे फूड का शुरुआती ब्रेकडाउन ही प्रभावित हो जाता है।
- इससे लंबे समय में गैस, ब्लोटिंग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
ग्राफिक से समझिए, हेल्दी डाइजेशन के लिए लाइफस्टाइल और खाने के तरीके में क्या बदलाव जरूरी हैं-

3. न्यूट्रिशन
बैलेंस्ड और वेरायटी डाइट गट माइक्रोब्स को स्थिर रखती है। इसे पॉइंटर्स से समझते हैं-
- हेल्दी वेरायटी डाइट से गुड बैक्टीरिया एक्टिव होते हैं और डाइजेस्टिव प्रोसेस स्मूद रहती है।
- सही न्यूट्रिशन गट लाइनिंग (आंतों की ऊपरी लेयर) को मजबूत करता है। इससे न्यूट्रिएंट्स का अवशोषण बेहतर होता है और शरीर में टॉक्सिन्स प्रवेश नहीं कर पाते हैं।
- संतुलित डाइट डाइजेस्टिव एंजाइम्स और बाइल जूस के सिक्रेशन को सपोर्ट करती है।
- यह फूड ब्रेकडाउन के लिए जरूरी होता है।
ग्राफिक में देखिए, हेल्दी डाइजेशन के क्या खाना चाहिए-

सवाल- किन गलतियों से डाइजेशन खराब होता है?
जवाब- खराब डाइजेशन शरीर के अंदर कई बायोलॉजिकल प्रोसेस को भी डिस्टर्ब करता है। जैसे-
- खराब खानपान और स्ट्रेस की वजह से गट माइक्रोब का संतुलन बिगड़ जाता है।
- अनहेल्दी डाइट पाचन के लिए जरूरी एंजाइम्स के प्रोडक्शन को प्रभावित करती है।
- इन आदतों से गट मूवमेंट स्लो हो जाता है। इससे फूड ज्यादा देर तक पेट में रुका रहता है और गैस, ब्लोटिंग व कब्ज जैसी समस्याएं होती हैं।
- खराब लाइफस्टाइल शरीर में लो-ग्रेड इंफ्लेमेशन बढ़ा सकता है।
नीचे ग्राफिक में देखिए कि हमारी कौन सी आदतें डाइजेशन को खराब करती हैं-

सवाल- क्या स्ट्रेस से भी डाइजेशन खराब होता है?
जवाब- हां, जब शरीर स्ट्रेस में होता है तो सिंपेथेटिक नर्वस सिस्टम (इमरजेंसी या स्ट्रेस्ड सिचुएशन में सक्रिय होता है) एक्टिव हो जाता है।
- इससे बॉडी ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में चली जाती है।
- इस दौरान शरीर डाइजेस्टिव प्रोसेस को स्लो कर देता है।
- बॉडी को मैसेज जाता है कि खुद को बचाना जरूरी है।
- ऐसे में ब्लड फ्लो ब्रेन और मसल्स की ओर बढ़ जाता है।
- पेट की ओर फ्लो कम होने से डाइजेशन स्लो हो जाता है।

सवाल- हेल्दी डाइजेशन के लिए अच्छी नींद क्यों जरूरी है?
जवाब- नींद के दौरान शरीर खुद को रिपेयर और रीसेट करता है, जिसमें डाइजेस्टिव सिस्टम भी शामिल है।
- पर्याप्त नींद से गट मूवमेंट सही रहता है। डाइजेस्टिव एंजाइम्स और हॉर्मोन्स भी बैलेंस्ड रहते है।
- नींद की कमी से भोजन सही तरीके से नहीं पचता है।
- अच्छे डाइजेशन के लिए रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी और गहरी नींद जरूरी है।
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