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Winter Finger Inflammation Reason; Chilblains Symptoms & Risk Factors


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37 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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मौसम बदलते ही शरीर को नए हालात में खुद को ढालना पड़ता है। तापमान में उतार-चढ़ाव शरीर पर असर डाल सकता है। कई बार यह बदलाव अंदरूनी संतुलन बिगाड़ देता है। इसका नतीजा अलग-अलग शारीरिक परेशानियों के रूप में सामने आता है। इन्हीं परेशानियों में से एक उंगलियों में इंफ्लेमेशन होना है।

ये तकलीफ रोज के कामों को भी मुश्किल बना देती है। अचानक फूली हुई उंगलियां दर्द, जलन और असहजता पैदा कर सकती हैं, जिससे मन में सवाल उठता है कि आखिर ये क्यों हो रहा है। दरअसल, ठंड में ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं और ब्लड फ्लो कम हो जाता है, जिसके चलते उंगलियों में इंफ्लेमेशन हो जाता है। मेडिसिन की भाषा में इस कंडीशन को चिल ब्लेन कहते हैं।

इसीलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि-

  • चिल ब्लेन क्या होता है?
  • चिल ब्लेन क्यों होता है?
  • किन्हें इसका खतरा ज्यादा रहता है?
  • इससे बचाव के आसान तरीके क्या हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल- चिल ब्लेन क्या होता है?

जवाब- चिल ब्लेन को पर्नियोसिस या पर्नियो भी कहा जाता है। दरअसल, जब स्किन लंबे समय तक ठंडी, नम हवा में रहती है, तो सतह के पास की ब्लड वेसेल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे ऑक्सीजन का फ्लो कम हो जाता है और इंफ्लेमेशन शुरू हो जाता है। बाद में जब स्किन अचानक गर्म होती है, तो ब्लड वेसेल्स तेजी से फैलती हैं। यह बदलाव कई बार इतना तेज होता है कि अतिरिक्त खून आसपास के टिशूज में रिसने लगता है, जिससे खुजली, लालिमा और इंफ्लेमेशन बढ़ जाता है।

सवाल- शरीर के किस हिस्से में चिल ब्लेन होते हैं?

जवाब- चिल ब्लेन आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों पर होते हैं, जो खुले हुए होते हैं। ये ज्यादातर हाथ-पैर जैसे हिस्सों पर दिखाई देते हैं। जैसे गाल, पैर की उंगलियां, नाक, कान, एड़ी और उंगलियां। कई बार यह टाइट कपड़ों से रगड़ खाकर भी होते हैं। ऐसे मामलों में जांघों या हिप्स पर हो सकते हैं। कई बार रेयर केस में चिल ब्लेन बटॉक्स पर भी हो सकते हैं।

सवाल- चिल ब्लेन के क्या लक्षण क्या होते हैं?

जवाब- चिल ब्लेन में आम तौर पर त्वचा पर लाल या नीले धब्बे दिखाई देने लगते हैं, जो ज्यादातर हाथों और पैरों पर होते हैं। कई बार इन धब्बों पर छोटे घाव या फफोले भी बन सकते हैं। प्रभावित हिस्से में स्वेलिंग आ जाती है, जिससे दर्द, जलन या चुभन जैसा अहसास होता है। ठंड के संपर्क में आने के बाद स्किन का रंग भी बदल सकता है। यह चिल ब्लेन का एक प्रमुख संकेत है।

सवाल- किन्हें चिल ब्लेन होने का खतरा ज्यादा रहता है?

जवाब- चिल ब्लेन किसी को भी हो सकता है, लेकिन कई रिसर्च में पाया गया है कि महिलाओं में इसकी संभावना पुरुषों की तुलना में अधिक होती है।

सवाल- चिल ब्लेन से बचने के लिए कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- चिल ब्लेन से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि शुरुआत में ही इसे होने से रोक दिया जाए। इसके लिए ठंड में कुछ सरल लेकिन बहुत प्रभावी सावधानियां अपनानी जरूरी हैं। ग्राफिक से समझते हैं-

सवाल- चिल ब्लेन का घरेलू इलाज क्या है?

जवाब- कुछ घरेलू उपाय चिल ब्लेन से काफी राहत दे सकते हैं। इसके लिए–

  • प्रभावित हिस्से को गर्म रखें।
  • गर्म दस्ताने और मोजे पहनें। साथ ही परतों वाले कपड़े पहनें।
  • ब्लैंकेट या लो सेटिंग हीटिंग पैड से हल्की गर्माहट दें।
  • प्रभावित हिस्से को डायरेक्ट हीट (बहुत गर्म पानी या हाई हीटिंग पैड) देने से बचें।
  • हल्की मालिश भी मददगार होती है, क्योंकि इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और असहजता कम होती है। लेकिन ध्यान रहे, अगर त्वचा फटी हो, फफोले हों या छूने पर ज्यादा दर्द हो रहा हो, तो मालिश न करें, वरना संक्रमण या और चोट लग सकती है।
  • नियमित रूप से मॉइस्चराइजर लगाने से खुजली, सूखापन और स्किन क्रैकिंग कम होती है। बेहतर है कि हल्के, खुशबू-रहित मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें, ताकि त्वचा में जलन न हो। इससे खुजली, ड्राईनेस और क्रैकिंग कम होती है
  • प्रभावित हिस्से को न खुजलाएं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जो आगे चलकर अल्सर या दाग भी बना सकता है।
  • कुछ प्राकृतिक उपाय जैसे एलोवेरा जेल, कैलेंडुला क्रीम या ओटमील सोक भी खुजली और जलन में आराम दे सकते हैं, लेकिन इन्हें सिर्फ स्वस्थ, बिना फटी त्वचा पर ही लगाएं। अगर किसी तरह की जलन महसूस हो तो तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें।
  • अगर लक्षण गंभीर हों या बार-बार लौटकर आएं, तो घरेलू उपायों से आगे बढ़कर डॉक्टर की देखरेख की जरूरत पड़ सकती है।

चिल ब्लेन से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब

सवाल- चिल ब्लेन का इलाज कैसे होता है?

जवाब- डॉक्टर आमतौर पर इसे फिजिकल चेकअप और विंटर एक्सपोजर हिस्ट्री के आधार पर कर लेते हैं। कभी–कभी अगर केस गंभीर, लगातार या असामान्य हो तो डॉक्टर ब्लड टेस्ट या स्किन बायोप्सी करवाकर दूसरी बीमारियों जैसे ल्यूपस या वास्कुलिटिस को रूल आउट कर सकते हैं।

सवाल- चिल ब्लेन कितने दिन में ठीक होता है?

जवाब- आमतौर पर चिल ब्लेन 2-3 हफ्ते में या मौसम गर्म होने पर खुद ठीक हो जाता है। अगर अगर 2–3 हफ्तों बाद भी लक्षण बने रहें या बार-बार लौट आएं, तो स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह जरूरी है।

सवाल- डॉक्टर के पास कब जाएं?

जवाब- अगर दो हफ्ते तक घर पर देखभाल करने के बाद भी चिल ब्लेन के लक्षण ठीक न हों, या मौसम गर्म हो जाने पर भी समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर से जरूर मिलें।

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