Sunday, 19 April 2026
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‘हमें सफाई देने की जरूरत नहीं’, मां के अंतिम संस्कार पर हुए बवाल पर जायद खान की दो टूक, कहा- धर्म से बड़ी इंसानियत


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जायद खान की मां जरीन खान का 81 साल की उम्र में पिछले साल नवंबर में मुंबई में निधन हो गया था. उनके अंतिम संस्कार के लिए हिंदू रीति-रिवाजों को चुने जाने पर काफी विवाद हुआ, जिस पर अब जायद खान ने चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने साफ किया कि उनके घर में इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और उन्होंने सिर्फ अपनी मां की आखिरी इच्छा पूरी की है. जायद ने कहा कि हमें किसी को सफाई देने की जरूरत नहीं है कि हमने ऐसा क्यों किया.

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मां के अंतिम संस्कार पर हुए बवाल पर जायद ने तोड़ी चुप्पी, दिया करारा जवाबZoom

जायद खान ने आलोचना करने वालों को दिया मुंहतोड़ जवाब.

नई दिल्ली. पिछले साल जरीन खान के हिंदू रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस छिड़ गई थी लोग सवाल उठाने लगे कि एक मुस्लिम परिवार में शादी करने और पारसी मूल की होने के बावजूद उनका अंतिम संस्कार हिंदू तरीके से क्यों हुआ? अब इन तमाम सवालों और आलोचनाओं पर जरीन खान के बेटे जायद खान ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने बताया कि यह उनकी मां की आखिरी इच्छा थी कि उनकी अस्थियों को नदी में विसर्जित किया जाए.

जूम को दिए इंटरव्यू में जायद खान उन्होंने साफ किया कि परिवार ने केवल उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान किया है. जायद ने कहा कि जब बात किसी की आखिरी ख्वाहिश की हो, तो वहां मजहब से ज्यादा इंसानियत और प्यार मायने रखता है. जायद खान ने बड़ी बेबाकी से कहा कि उनके घर में इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है. उन्होंने बताया कि उनके घर का स्टाफ अलग-अलग बैकग्राउंड से आता है और उनका परिवार सिर्फ उनके रहने-खाने का ही ख्याल नहीं रखता, बल्कि उनके बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के लिए भी हर मुमकिन मदद करता है.

परिवार के लिए धर्म एक निजी मामला

एक्टर ने कहा, ‘हमारे परिवार के लिए धर्म एक बहुत ही निजी मामला है. आप इसे कैसे मानते हैं, यह आप पर निर्भर करता है. हमारे यहां कौन सा धर्म अच्छा है और कौन सा बुरा, इस तरह की बातों की कोई जगह नहीं है. हम खुद को एक सेक्युलर परिवार मानते हैं और हमें किसी को यह बताने या साबित करने की जरूरत नहीं है कि हम ऐसे क्यों हैं.’

मां ने बताई थी अपनी आखिरी इच्छा

जायद खान ने उस खास पल को याद करते हुए बताया कि कैसे उनकी मां ने अपनी आखिरी इच्छा उनके सामने रखी थी. उन्होंने कहा, ‘एक दिन मां एक खूबसूरत नदी के किनारे बैठी थीं और अचानक उनके मन में एक खयाल आया. उन्होंने कहा कि अगर कभी मैं चली जाऊं, तो मैं चाहती हूं कि मेरी अस्थियां इसी नदी की लहरों में बहें. मैं बस आजाद होना चाहती हूं.’

मां की इच्छा पूरा करना हमारा फर्ज

मां की ख्वाहिश को सबसे ऊपर रखते हुए जायद ने दोटूक शब्दों में कहा, ‘मां की आखिरी इच्छा जो भी हो, उसे पूरा करना ही हमारा फर्ज है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दुनिया क्या कहती है या लोग कितनी नफरत फैलाते हैं. मैं उन्हें दोष नहीं देता, क्योंकि आज के हालात ही कुछ ऐसे हैं और बदकिस्मती से इन हालातों को बदलने में अभी वक्त लगेगा.’

हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था अंतिम संस्कार

बताते चलें कि पिछले साल 7 नवंबर को जायद खान और सुजैन खान की मां जरीन खान का मुंबई में निधन हो गया था. 81 साल की उम्र में उन्होंने बढ़ती उम्र की बीमारियों के चलते दुनिया को अलविदा कह दिया था. पारसी मूल की होने के बावजूद उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके बेटे जायद ने हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया. जरीन खान साल 1963 में ‘तेरे घर के सामने’ में देव आनंद के साथ नजर आई थीं. 60 के दशक में ही उनकी मुलाकात दिग्गज एक्टर संजय खान से हुई और 1966 में दोनों शादी के बंधन में बंध गए थे.

About the Author

Kamta Prasad

साल 2015 में दैनिक भास्कर से करियर की शुरुआत की. फिर दैनिक जागरण में बतौर टीम लीड काम किया. डिजिटल करियर की शुरुआत आज तक से की और एबीपी, ज़ी न्यूज़, बिज़नेस वर्ल्ड जैसे संस्थानों में काम किया. पिछले 6 सालों से …और पढ़ें



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