Thursday, 23 April 2026
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ट्रायल देखने पहुंचा प्रोड्यूसर, बीच में ही सो गया, किशोर कुमार ने गाया कालजयी सॉन्ग, मूवी ने तो‌ड़े रिकॉर्ड


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Kishor Kumar Timeless Song : वैसे तो किसी भी प्रोड्यूसर के लिए उसकी फिल्म किसी सपने से कम नहीं होती. वो उसकी कृति होती है जिसे साकार करने का काम डायरेक्टर करता है. अगर कोई प्रोड्यूसर अपनी फिल्म के ट्रायल के दौरान ही सो जाए तो आप क्या कहेंगे. यही अंदाजा लगाएंगे कि फिल्म बोरिंग होगी लेकिन हुआ इसके ठीक उलट. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड बनाए. यह उस साल की सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्म भी बनी. फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई. किशोर कुमार का हेमा मालिनी पर फिल्माया गया गाना अमर हो गया. यह मूवी कौन सी थी, वो गाना कौन सा था, आइये जानते हैं……….

यह कहानी उस ब्लॉकबस्टर फिल्म की जिसमें किशोर कुमार का एक कालजयी गाना था. गाना 16 दरवाजों वाले सेट में फिल्माया गया था. फिल्म के जब बनकर तैयार हुई और ट्रायल का समय आया. प्रोड्यूसर ट्रायल देखने आए लेकिन बीच में ही सो गए. मजे की बात यह है कि यही मूवी रिलीज होते ही छा गई. पहले दिन से ही फिल्म सिनेमाघरों में हाउसफुल चली. बात 1970 की फिल्म ‘जॉनी मेरा नाम’ की हो रही है जिसे विजय आनंद ने डायरेक्ट किया था. फिल्म के प्रोड्यूसर गुलशन राय थे. फिल्म तो ब्लॉकबस्टर रही लेकिन विजय आनंद और गुलशन राय ने फिर कभी एकदूसरे के साथ काम नहीं किया. आइये जानते हैं इस फिल्म के बनने की दिलचस्प कहानी…..

‘जॉनी मेरा नाम’ 20 नवंबर 1970 को रिलीज हुई थी. फिल्म में डायरेक्टर विजय आनंद के बड़े भाई देवानंद-हेमा मालिनी लीड रोल में थे. प्राण-प्रेमनाथ, जीवन, आइएस. जौहर, इफ्तिखार, और पद्मा खन्ना अहम भूमिकाओं में थे. फिल्म की कहनी केए नारायण ने लिखी थी. प्रोड्यूसर गुलशन राय थे. वही गुलशन राय जिन्होंने दीवार, त्रिशूल, विधाता, विश्वात्मा, त्रिदेव, मोहरा, गुप्त जैसी सुपरहिट फिल्में प्रोड्यूस कीं.

जॉनी मेरा नाम के बनने की कहानी बेहद दिलचस्प है. दरअसल, लाहौर में जन्मे गुलशन राय विभाजन के बाद 1947 में मुंबई में आकर बस गए थे. 1951 से उन्होंने फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूशन का कामकाज शुरू किया. वो ‘ज्वेल थीफ’ और ‘गाइड’ जैसी फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूटर थे. फिर उन्होंने प्रोड्यूसर बनने की ठानी. बीआर चोपड़ा उनके अच्छे दोस्त थे. गुलशन राय ने एक फिल्म में पैसा लगाया लेकिन फिल्म बुरी तरह फ्लॉप रही. इस पर बीआर चोपड़ा ने मजाक उड़ाते हुए कहा था कि सफल प्रोड्यूसर बनना आपके बस की बात नहीं.

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गुलशन राय के दिल में बीआर चोपड़ा की यह बात चुभ गई. पंजाब के होशियारपुर में वैदिक कालीन भृगु संहिता से भविष्याणी की जाती हैं. गुलशन राय होशियारपुर पहुंचे. वहां उनसे विजय आनंद के साथ फिल्म बनाने को कहा गया. गुलशन राय ‘गाइड’ के डिस्ट्रीब्यूटर थे इसलिए उनकी देवानंद और विजय आनंद से अच्छी दोस्ती थी. गुलशन ने विजय आनंद से एक फिल्म बनाने के लिए कहा लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. फिर उन्होंने एक मौलाना से फोन भी करवाया. विजय आनंद हैरान रह गए. उन्होंने यह बात देवानंद को बताई. देवानंद ने गुलशन के साथ फिल्म बनाने को कहा. विजय आनंद उर्फ गोल्डी ने फिल्म के लिए 5 लाख रुपये की फीस मांगी. इस पर गुलशन राय ने कहा कि अभी मैं इतने पैसे नहीं दे सकता लेकिन मेरी कंपनी ‘त्रिमूर्ति फिल्म्स’ में तुम एक तिहाई के हिस्सेदार रहोगे. तुम मेरे छोटे भाई की तरह हो, मुझे यकीन है कि मेरी मदद करोगे. गोल्डी बहुत ही भावुक थे. वो मान गए.

गुलशन राय ने ही फिल्म में हेमा मालिनी को लेने की सलाह गोल्डी को दी थी. साथ ही फिल्म का म्यूजिक कल्याण जी-आनंद जी से लेने को कहा था. गोल्डी इसके लिए भी तैयार हो गए. उन्होंने फिल्म के लिए 6 गाने चुने. गीतकार राजेंद्र कृष्ण और इंदीवर थे. फिल्म के सुपरहिट गानों में ‘ओ बाबुल प्यारे’, ‘मोसे मोरा श्याम रूठा’, ‘नफरत करने वालों के सीने में प्यार भर दूं’, ‘पलभर के लिए कोई हमें प्यार कर ले, झूठा ही सही’, ‘ओ मेरे राजा, खफा ना होना’ और ‘हुस्न के लाखों रंग’ सॉन्ग शामिल थे.

फिल्म का हर गाना सुपरहिट था लेकिन एक गाना ‘पलभर के लिए कोई हमें प्यार कर ले, झूठा ही सही’ किशोर कुमार-ऊषा खन्ना की आवाज में था. इस गाने को किशोर दा ने अमर कर दिया. गाना 16 दरवाजे वाले सेट पर फिल्माया गया था. यह सब गोल्डी के दिमाग की उपज थी. गाने का फिल्मांकन हिंदी सिनेमा के इतिहास में दर्ज है. फिल्म के गाने आज तक पॉप्युलर हैं.

मजेदार बात यह है कि फिल्म के ट्रायल के दौरान गुलशन राय सो गए थे. उनके बारे में कहा जाता था कि जिस फिल्म के ट्रायल में वो सो जाएंगे, वो फिल्म ब्लॉकबस्टर निकलेगी. इस फिल्म के साथ ऐसा ही कुछ हुआ. गुलशन राय ने देवानंद को 12 लाख रुपये देने की बात कही थी. फिर दो लाख रुपये कम करवा लिए. फिल्म पहले ही दिन से कामयाब रही. गुलशन राय डायरेक्टर विजय आनंद उर्फ गोल्डी से मिलने आए. गोल्डी से उन्होंने पूछा कि फिल्म की फीस कितने लेंगे? यह सुनकर गोल्डी हैरान रह गए. बात तो फिल्म के प्रॉफिट में एक तिहाई हिस्से की हुई थी. गोल्डी ने कहा कि मैंने आपको बड़ा भाई समझकर फिल्म बनाई है. गुलशन ने एक तिहाई की हिस्से की बात नहीं की और एक लाख का चेक टेबल पर गोल्डी के सामने रख दिया. गोल्डी बहुत खफा हुए. किसी तरह गुस्से को संभाला और कहा कि आपसे एक भी पैसा नहीं लूंगा. गुलशन राय भी बिना पैसे दिए वहां से चले गए.

गोल्डी ने फिर कभी गुलशन राय के लिए काम नहीं किया. विजय आनंद की बॉयोग्राफी ‘एक था गोल्डी’ में इस किस्से का जिक्र है. ‘जॉनी मेरा नाम’ 1970 की सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्म साबित हुई. विलेन प्रेमनाथ की जिंदगी इसी फिल्म ने बदली. प्रेमनाथ एक्टिंग छोड़कर घर में बैठ गए थे. गोल्डी ने उन्हें फिल्म में काम किया था. प्रेमनाथ राज कपूर के साला साहब थे. यानी ऋषि कपूर के सगे मामा थे.

‘जॉनी मेरा नाम’ का बजट करीब 1 रुपये था. फिल्म ने 4 करोड़ का नेट कलेक्शन किया था. जब लग रहा था कि बॉलीवुड में देवानंद का स्टारडम डूब रहा था, तब इस फिल्म ने इतिहास रच दिया. देवानंद की स्टार वैल्यू एक बार फिर से बढ़ा दी. वैसे बॉक्स ऑफिस पर इस साल राजेश खन्ना ही असली राजा था. उनकी ‘सच्चा झूठा’, ‘आन मिलो सजना’ दूसरे और तीसरे नंबर पर थीं. राजेश खन्ना का स्टारडम पीक पर था.

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