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एक फैन की चिट्ठी ने रच दिया ऐसा जादू, जो सालों बाद भी दिलों में ताजा है. उस दौर में जब प्यार के इजहार के लिए खत ही सबसे खास जरिया होते थे, एक सच्ची भावना से भरे खत ने गीतकार इंदीवर को गहराई से छू लिया. उसी एहसास को शब्दों में ढालकर उन्होंने एक ऐसा लव एंथम रचा, जो हर दिल की कहानी बन गया. संगीत की मधुर धुन और लता मंगेशकर और मुकेश की भावपूर्ण आवाज ने इसे अमर बना दिया. एक ऐसा गीत, जिसमें खत के जरिए बयां हुआ प्यार आज भी जिंदा है.
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में कई ऐसे गाने बने, जिनके पीछे की कहानियां उतनी ही दिलचस्प हैं जितनी उनकी धुन. साल 1968 में आई फिल्म ‘सरस्वतीचंद्र’ के गाने भी एहसास बनकर दिल में ऐसे उतरे कि सालों बाद भी उनकी धुन और बोल नए लगते हैं. ‘चंदन सा बदन’, ‘छोड़ दी सारी दुनिया’, ‘हमने अपना सबकुछ खोया’, ‘मैं तो भूल चली’ और ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’. ये वो गाने हैं, जिनको आज 58 साल के भी लोग गुनगुनाते हैं. ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’ गीत तो एक अनोखी कहानी समेटे हुए है. यह सिर्फ एक रोमांटिक गीत नहीं, बल्कि एक फैन की चिट्ठी से जन्मा लव एंथम है, जिसने दशकों से श्रोताओं के दिलों में खास जगह बनाई हुई है. क्या है ये मजेदार किस्सा चलिए बताते हैं.
फिल्म ‘सरस्वतीचंद्र’ इसी नाम के गुजराती उपन्यास पर बना था. फिल्म में नूतन, मनीष, विजया चौधरी, रमेश देओ और बीएम व्यास जैसे कलाकार नजर आए. फिल्म के डायरेक्टर थे गोविंद सरैय्या और संगीतकार थे कल्याण जी-आनंद जी. इस गाने ने उस दौर में प्रेमी-प्रेमिकाओं को खत के जरिये फूल भेजने के लिए प्रेरित किया, जो बाद में एक ट्रेंड बन गया.
इंदीवर की लेखनी ने एक बार कमाल किया और फिल्म के एक दो नहीं बल्कि ‘छोड़ दे दुनिया सारी’ और ‘चंदन सा बदन’ के साथ ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’ गाना भी लिखा. इंदीवर फिल्म के गाने लिखने की कोशिश में थे. उन दिनों सिर्फ स्टार्स को ही नहीं पर्दे के पीछे के स्टार्स यानी गायक और संगीतकारों को भी फैंस चिट्ठी-पत्री भेजते थे.
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फिल्म के संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी के पास प्रशंसकों की चिट्ठियां आती रहती थीं. एक दिन ऐसा ही एक पत्र आया, जिसके अंदर एक खूबसूरत फूल रखा था और उस फूल पर हल्का सा लिपस्टिक का निशान था. इस चिट्ठी को देखकर संगीतकार आनंदजी ने मजाक में इसे अपने भाई कल्याणजी और वहां बैठे गीतकार इंदीवर को दिखाया.
इंदीवर का इस पत्र पर ध्यान गया और उनके मन में एक अनोखा विचार कौंधा. उन्होंने कहा, ‘इससे तो गाने का मुखड़ा बन सकता है.’ उन्होंने तुरंत पंक्ति गढ़ी ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में, फूल नहीं मेरा दिल है.’ इस तरह एक साधारण सी चिट्ठी ने एक अमर प्रेमगीत को जन्म दे दिया. यह गीत इतना सहज और सच्चा था कि संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी ने इसे अपनी सुरीली धुन दी.
गीत को आवाज दी लता मंगेशकर और मुकेश की मशहूर जोड़ी ने. लता जी की कोमल आवाज और मुकेश साहब के गहरे भर्राटे ने मिलकर इस गीत को प्रेमियों की जुबान पर चढ़ा दिया. गीतकार इंदीवर ने शायद ही सोचा होगा कि उनके द्वारा लिखा यह गीत ‘लव एंथम’ बनकर युगों तक प्रेम को परिभाषित करेगा.
रिकॉर्डिंग के समय स्टूडियो में एक खास सन्नाटा और एकाग्रता का माहौल था. हर शब्द और हर सुर को इस तरह तराशा गया कि कोई भी भाव अधूरा न रह जाए. यही कारण है कि ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’ सुनते ही आज भी एक अलग सुकून और रोमांटिक एहसास जाग उठता है. यह गाना न सिर्फ फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाता है, बल्कि उस दौर के प्रेम की सादगी को भी बखूबी दर्शाता है.
फिल्म के संगीत के लिए ही कल्याण जी-आनंदजी को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया था. नूतन और मनीष की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म ने प्रेम, विरह और संयम की कहानी को अपने संगीत के माध्यम से हमेशा के लिए अमर कर दिया.
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