Monday, 27 April 2026
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सुनील दत्त की फिल्म से बना ‘खलनायक’, अमिताभ बच्चन के लिए साबित हुए खतरा, खूबसूरती पर फिदा हो जाती थीं एक्ट्रेसेस


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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना की खूबसूरती पर कई एक्ट्रेसेस फिदा थीं. उनका नाम आते ही एक ऐसे स्टार की छवि सामने आती है, जिसने हर रोल में अपनी अलग छाप छोड़ी. वह सिर्फ एक्टिंग में ही नहीं, बल्कि खेलों में भी काफी आगे थे. कम ही लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले उनका झुकाव स्पोर्ट्स की तरफ ज्यादा था.

नई दिल्ली. विनोद खन्ना ने अपने करियर की शुरुआत विलेन बनकर की थी. लेकिन एक वक्त के बाद वह रोमांटिक हीरो बनकर उभरे थे. अपने करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया है.

यूं तो वह 70-80 के दशक में हर बड़े स्टार के लिए खतरा बने हुए थे. लेकिन उनका मुकाबला हमेशा से ही अमिताभ बच्चन से होता रहा. अपने एक इंटरव्यू में खुद विनोद खन्ना ने कहा था हम दोनों के बीच तगड़ा कॉम्पिटीशन था.

विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 को पेशावर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है. बंटवारे के बाद उनका परिवार मुंबई आ गया. उन्होंने अपनी पढ़ाई मुंबई और दिल्ली में की और सिडनहम कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया.

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बचपन से ही उन्हें खेलों का बहुत शौक था. टेनिस, क्रिकेट और फुटबॉल उनके पसंदीदा खेल थे. इतना ही नहीं, उन्होंने कुश्ती की ट्रेनिंग भी ली थी. उनकी फिट बॉडी और दमदार पर्सनैलिटी ने उन्हें बाकी लोगों से अलग पहचान दी.

इस गाने को आवाज इंडस्ट्री की स्वरकोकिला लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने दी थी. दोनों की जादुई आवाज ने इस गाने को खास बना दिया. वहीं इसके बोल लिखे थे गुलशन बावरा ने , गाने के बोल ऐसे हैं, जो सीधे दिल में उतर जाते हैं.

फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें पहला मौका सुनील दत्त ने दिया. फिल्म मन का मीत में उन्होंने खलनायक का रोल निभाया. इस फिल्म में वह हीरो के खिलाफ नजर आए, लेकिन अपने अभिनय से उन्होंने सबका ध्यान खींच लिया. खलनायक के रूप में शुरुआत करने के बावजूद, वह जल्दी ही लीड हीरो बन गए.

उनका करियर हिट फिल्मों से भरा पड़ा है. अमर अकबर एंथोनी, हेरा फेरी, मेरा गांव मेरा देश जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई. वहीं फिल्म मेरे अपने से उनके सीरियस रोल्स की शुरुआत हुई, जिसे गुलजार ने डायरेक्ट किया था.

इसके बाद उन्होंने इम्तिहान और मीरा जैसी फिल्मों में भी काम किया. उनकी एक्टिंग में गहराई और अलग अंदाज साफ नजर आता था.70 और 80 के दशक में जब अमिताभ बच्चन का दौर था, तब भी विनोद खन्ना ने अपनी अलग पहचान बनाई. जब भी दोनों एक साथ स्क्रीन पर आए, दर्शकों को बराबर की टक्कर देखने को मिली.इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. आज ही के दिन 27 अप्रैल 2017 को विनोद खन्ना ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी फिल्में और उनका अंदाज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है.

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