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बॉलीवुड में कई जोड़ियां बनीं, लेकिन गोविंदा और कादर खान जैसी केमिस्ट्री फिर कभी देखने को नहीं मिली. एक समय था जब इन दोनों की मौजूदगी ही किसी फिल्म की सफलता की गारंटी होती थी. हालांकि, समय का चक्र ऐसा घूमा कि साल 2013 और 2018 गोविंदा की जिंदगी में एक गहरा जख्म दे गया. 2013 में एक अनकही खामोशी ने इस महान जोड़ी को हमेशा के लिए अलग कर दिया, वहीं 2018 में कादर खान की मौत ने बॉलीवुड से गोविंदा का वजूद मिटा दिया. यह कहानी सिर्फ दो कलाकारों की नहीं, बल्कि एक युग के अंत और एक सुपरस्टार के अकेलेपन की है.
नई दिल्ली. बॉलीवुड के इतिहास में 80 और 90 का दशक गोविंदा और कादर खान के नाम रहा. यह कोई इत्तेफाक नहीं था कि जिन फिल्मों में कादर खान ने डायलॉग लिखे और गोविंदा ने काम किया, वे ब्लॉकबस्टर रहीं. वह गोविंदा के लिए एक मेंटर, एक राइटर और एक पिता जैसे गाइड थे, जिन्होंने विरार के एक लड़के को नंबर 1 सुपरस्टार बना दिया. लेकिन इस सफलता के पीक के बाद, एक ऐसी मंदी आई जिसने सब कुछ तोड़ दिया. 2013 गोविंदा के लिए एक बड़ा झटका था. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह वह समय था जब कादर खान की सेहत खराब होने लगी और वह धीरे-धीरे लाइमलाइट से दूर हो गए. 2013 के बाद, गोविंदा और कादर खान के बीच ऑन-स्क्रीन कोलेबोरेशन फिर कभी नहीं देखा गया.
अक्सर कहा जाता है कि गोविंदा की आधी कॉमिक टाइमिंग कादर खान के डायलॉग की वजह से थी. 2013 के आसपास, जब बॉलीवुड का फिल्ममेकिंग स्टाइल बदला, तो कादर खान जैसे क्लासिक राइटर साइडलाइन होने लगे. इसका सीधा असर गोविंदा पर पड़ा. कादर खान के शब्दों के बिना, गोविंदा की एक्टिंग बिना आत्मा के शरीर जैसी लगती थी. 2013 ने गोविंदा से उनका सबसे बड़ा हथियार- कादर खान का सपोर्ट छीन लिया.
जब 31 दिसंबर, 2018 को कनाडा से कादर खान के गुजरने की खबर आई, तो कहा जाता है कि गोविंदा को बहुत बड़ा झटका लगा था, लेकिन 2018 सिर्फ पर्सनल नुकसान का साल नहीं था. यह वह साल भी था जब गोविंदा की बॉक्स ऑफिस पर बड़ी कमाई की उम्मीदें भी टूट रही थीं.
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2018 तक, मेनस्ट्रीम बॉलीवुड ने गोविंदा को पूरी तरह से किनारे कर दिया था. वह डायरेक्टर्स की नई पीढ़ी और बदलते कॉर्पोरेट कल्चर में फिट नहीं हो पा रहे थे. मजे की बात यह है कि जिस साल उनके सबसे प्यारे दोस्त और राइटर, कादर खान गुजर गए, उसी साल गोविंदा का फिल्मी करियर भी लगभग बिना बताए खत्म हो गया. 2018 के बाद, गोविंदा किसी भी बड़ी कमर्शियल फिल्म का हिस्सा नहीं बन पाए और वह धीरे-धीरे रियलिटी शो और सोशल मीडिया तक ही सीमित हो गए.
गोविंदा के करियर के गिरने और कादर खान की गैरमौजूदगी के बीच एक गहरा कनेक्शन था. कादर खान को अच्छी तरह पता था कि गोविंदा की बॉडी लैंग्वेज पर कौन से शब्द सूट करेंगे. जब कादर खान एक्टिव थे, तो उन्होंने गोविंदा के लिए ‘कुली नंबर 1’, ‘साजन चले ससुराल’ और ‘दूल्हे राजा’ जैसी फिल्मों में स्क्रिप्ट लिखीं. 2013 के बाद जब यह कोलेबोरेशन खत्म हो गया तो गोविंदा ने कमजोर स्क्रिप्ट वाली फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया.
2018 में कादर खान के जाने के साथ, गोविंदा को एक सफल एक्टर के तौर पर जोड़े रखने वाला आखिरी धागा भी टूट गया. बॉलीवुड की पॉलिटिक्स और गुटबाजी ने भी गोविंदा को उस समय अकेला छोड़ दिया जब उन्हें सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत थी.
गोविंदा आज भी लाखों दिलों पर राज करते हैं, लेकिन 2013 और 2018 के जख्म उनकी प्रोफेशनल लाइफ में हमेशा के लिए बस गए हैं. ये दो साल हमें याद दिलाते हैं कि बॉलीवुड में सफलता सिर्फ एक एक्टर के बारे में नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे के राइटर और मेंटर के बारे में भी है. कादर खान के बिना गोविंदा अधूरे थे और 2018 ने उस अधूरेपन को हमेशा के लिए खत्म कर दिया. गोविंदा भले ही अब बॉलीवुड फिल्मों से दूर हो गए हों, लेकिन कादर खान के साथ उनकी फिल्में आज भी हमें उस समय की याद दिलाती हैं जब कॉमेडी का मतलब सिर्फ गोविंदा और कादर खान होता था.
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