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Online Weight Loss Tips; Social Media Health Hacks Risk Factors


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6 घंटे पहले

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तमिलनाडु के मदुरै में एक 19 साल की लड़की की डेथ हो गई। वो स्लिम-ट्रिम दिखना चाहती थी। इसके लिए सोशल मीडिया से वजन घटाने के टिप्स लेती रहती थी। सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल था, जिसमें बताया गया था कि बोरेक्स खाने से चर्बी घटती है। इंसान पतला हो जाता है।

फिर क्या था, लड़की ने दुकान से बोरेक्स खरीदा और खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

बोरेक्स खाने के बाद उसे अचानक उल्टी-दस्त होने लगे। उसे अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।

बोरेक्स एक बेहद खतरनाक टॉक्सिक केमिकल है। यह खाने की चीज नहीं है।

यूट्यूब और सोशल मीडिया पर अक्सर कोई-न-कोई हेल्थ हैक्स वायरल होते रहते हैं। लोग इनकी जांच-पड़ताल किए बिना ही इन्हें फॉलो कर लेते हैं। इससे परेशानी में पड़ते हैं और कुछ मामलों में तो जान से भी हाथ धोना पड़ता है।

इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि वायरल हेल्थ हैक्स कितने खतरनाक हो सकते हैं। साथ ही जानेंगे कि-

  • सोशल मीडिया से हेल्थ टिप्स क्यों नहीं लेने चाहिए?
  • हेल्थ से जुड़ी जानकारियां कहां से लेनी चाहिए?
  • पर्सनल हेल्थ एडवाइस लेने का सही तरीका क्या है?

एक्सपर्ट: डॉ. संचयन रॉय, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली

सवाल- बोरेक्स क्या होता है?

जवाब- सबसे पहले और सबसे जरूरी बात ये कि बोरेक्स खाने की चीज नहीं है। यह एक केमिकल है, जिसका वैज्ञानिक नाम सोडियम बोरेट है।

  • यह आमतौर पर क्लीनिंग प्रोडक्ट, डिटर्जेंट, कीटनाशक और कुछ इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होता है।
  • बोरेक्स का काम गंदगी हटाना और बैक्टीरिया को खत्म करना है। यह शरीर के लिए खतरनाक टॉक्सिन है।

सवाल- बोरेक्स एक केमिकल कंपाउंड है, लेकिन अगर गलती से कोई इसे खा ले तो क्या होगा?

जवाब- अगर कोई इस टॉक्सिक केमिकल को गलती से खा लेता है, तो–

  • सबसे पहले यह पेट और आंतों को डैमेज करना शुरू करता है।
  • तेज जलन, उल्टी और दस्त शुरू हो सकते हैं।
  • शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की सीवियर कमी हो सकती है, जिससे जान तक जा सकती है।
  • बोरेक्स ब्लड में जाकर किडनी को प्रभावित कर सकता है, जिससे किडनी फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • गंभीर मामलों में यह नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित कर सकता है।
  • सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और हार्ट रेट बिगड़ सकती है।
  • तुरंत इलाज नहीं मिलने पर मौत हो सकती है।

सवाल- अगर काेई व्यक्ति गलती से बोरेक्स या उसके जैसा टॉक्सिक केमिकल कंपाउंड खा ले तो तुरंत क्या एक्शन लेना चाहिए कि जान का खतरा न हो?

जवाब- गलती से बोरेक्स या कोई टॉक्सिक केमिकल खा लिया है तो सबसे पहले घबराएं नहीं।

  • अपने मन से कोई घरेलू इलाज न करें।
  • मुंह में जलन या केमिकल का स्वाद हो तो साफ पानी से मुंह अच्छी तरह धोएं।
  • तुरंत नजदीकी अस्पताल या इमरजेंसी सेंटर पहुंचें।
  • डॉक्टर को बताएं कि कौन-सा केमिकल और कितनी मात्रा में लिया है।
  • यह भी बताएं कि इसे लिए हुए कितना समय बीत चुका है। जितनी जल्दी मेडिकल मदद मिलेगी, जान का खतरा उतना ही कम होगा।
  • अगर अस्पताल दूर है या बेहोशी आ रही है तो तुरंत ये काम करें–
  1. किसी करीबी को फोन करें।
  2. 108 नंबर पर फोन करके एंबुलेंस बुलाएं।
  3. या 112 इमरजेंसी नंबर पर फोन करें।

साथ ही ध्यान रखें कि जबरदस्ती उल्टी की कोशिश न करें, क्योंकि इससे गले और फेफड़ों को नुकसान हो सकता है।

सवाल- एक लड़की ने सोशल मीडिया वायरल ट्रेंड से अपनी जान गंवा दी। एक आम इंसान के लिए इस घटना का सबसे बड़ा सबक क्या है?

जवाब- घटना का सबसे बड़ा सबक यह है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली हर हेल्थ इंफॉर्मेशन, हर हेल्थ ट्रेंड सुरक्षित या वैज्ञानिक नहीं होता।

  • हमें ये समझना चाहिए कि जिस चीज का भी हमारे शरीर पर असर पड़ सकता है, उसके लिए डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूरी है।
  • जल्दी वजन घटाने के लिए या किसी हेल्थ कंडीशन में आराम पाने की चाह में लोग बिना जांच-पड़ताल के खतरनाक चीजें अपनाने लगते हैं।
  • कोई केमिकल या घरेलू प्रोडक्ट किसी भी कीमत पर दवाई का विकल्प नहीं हो सकता।
  • साइंटिफिक जानकारी सिर्फ उस व्यक्ति से लेनी चाहिए, जिसे साइंस पता हो, जिसने मेडिसिन की पढ़ाई की हो, जो उस विषय का एक्सपर्ट हो।

सवाल- कभी भी सोशल मीडिया से हेल्थ टिप्स क्यों नहीं लेने चाहिए?

जवाब- सोशल मीडिया पर मिलने वाले हेल्थ टिप्स अक्सर अधूरे और जनरलाइज्ड होते हैं। हर इंसान को उम्र, बीमारी और जरूरत के हिसाब से अलग हेल्थ टिप्स की जरूरत होती है, जबकि वायरल टिप्स ‘वन-साइज-फिट्स-ऑल’ तरीके से बताए जाते हैं। इसका मतलब है, एक ही चीज को सबके लिए ठीक मान लेना।

कई बार इनमें गलत जानकारी या खतरनाक प्रयोग शामिल होते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वैज्ञानिक रूप से सही हेल्थ एडवाइस वही होती है, जो मेडिकल स्टडी और एक्सपर्ट अनुभव पर आधारित हो। इसलिए हेल्थ टिप्स के लिए सिर्फ डॉक्टर्स और प्रमाणित एक्सपर्ट पर ही भरोसा करें।

सवाल- क्या सोशल मीडिया पर मौजूद हरेक हेल्थ कंटेंट फर्जी ही होता है?

जवाब- नहीं, ऐसा नहीं है। सोशल मीडिया पर हर हेल्थ कंटेंट फर्जी नहीं होता, लेकिन हर कंटेंट भरोसेमंद भी नहीं होता है। कुछ डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट और हेल्थ एक्सपर्ट सही और वैज्ञानिक जानकारी भी साझा करते हैं।

समस्या तब होती है, जब बिना मेडिकल ज्ञान वाले लोग घरेलू नुस्खे या केमिकल को ‘जादुई ट्रीटमेंट’ बताने लगते हैं। वैज्ञानिक तौर पर किसी भी हेल्थ एडवाइस की जांच जरूरी है।

कोई डॉक्टरी सलाह मानने से पहले देखें कि क्या उसका सोर्स भरोसेमंद है, क्या वह किसी रिसर्च पर आधारित है और क्या उसे किसी रामबाण इलाज की तरह पेश किया जा रहा है। सोशल मीडिया से जानकारी ले सकते हैं, लेकिन इलाज नहीं करना चाहिए।

सवाल- हम कैसे तय करें कि कोई जानकारी सही है या फर्जी?

जवाब- किसी भी हेल्थ एडवाइस को सही मानने से पहले उसे कुछ वैज्ञानिक कसौटियों पर परखना जरूरी है।

  • सबसे पहले देखें कि जानकारी देने वाला व्यक्ति डॉक्टर, एक्सपर्ट या भरोसेमंद संस्थान है या नहीं।
  • दूसरी बात, क्या उस दावे के पीछे किसी रिसर्च, स्टडी या मेडिकल गाइडलाइन का जिक्र है।
  • क्या वह ‘गारंटीड इलाज’ या ‘चमत्कारी फायदा’ जैसे शब्द इस्तेमाल कर रहा है। अगर ऐसा है तो वह फर्जी है। डॉक्टर कभी भी 100 फीसदी दावा नहीं करते। वो गारंटी के साथ बात नहीं करते।
  • क्या वो सोशल मीडिया पर बीमारी का इलाज सुझा रहा है क्योंकि काबिल डॉक्टर कभी सोशल मीडिया पर इलाज नहीं बताते। वे सिर्फ हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह देते हैं।
  • यह भी देखें कि वही जानकारी किसी दूसरे भरोसेमंद सोर्स पर मिल रही है या नहीं।
  • सोशल मीडिया पर मिला कोई इलाज अगर आपको सही भी लगता है, तो भी उसे फॉलो करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

सवाल- हेल्थ टिप्स देने के लिए कौन ऑथराइज्ड है और कौन नहीं? किसी की राय मानने से पहले उसकी क्रेडिबिलिटी कैसे चेक करें?

जवाब- हेल्थ टिप्स देने के लिए वही व्यक्ति ऑथराइज्ड होता है, जिसके पास मेडिकल या हेल्थ से जुड़ी डिग्री और लाइसेंस हो, जैसे डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या फिजियोथेरेपिस्ट।

किसी की राय मानने से पहले उसकी क्रेडिबिलिटी जांचना जरूरी है। देखें कि उसने अपनी क्वालिफिकेशन साफ-साफ बताई है या नहीं। वह किसी मेडिकल काउंसिल या संस्थान से रजिस्टर्ड है या नहीं। यह भी जांचें कि उसकी बात रिसर्च और गाइडलाइंस पर आधारित है या नहीं। अगर जानकारी वैज्ञानिक नहीं लगती, तो उसे कभी न अपनाएं।

सवाल- हेल्थ से जुड़ी जानकारियां कहां से लेनी चाहिए?

जवाब- हेल्थ से जुड़ी जानकारियां हमेशा भरोसेमंद और वैज्ञानिक सोर्स से लेनी चाहिए। इसके लिए सबसे अच्छा विकल्प डॉक्टर और प्रमाणित हेल्थ एक्सपर्ट होते हैं, क्योंकि वे व्यक्ति की उम्र, बीमारी और जरूरत के हिसाब से सलाह देते हैं।

इसके अलावा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान, मेडिकल कॉलेज और WHO या ICMR जैसी मान्यता प्राप्त संस्थाओं की वेबसाइट्स विश्वसनीय मानी जाती हैं। किताबें, मेडिकल गाइडलाइंस और रिसर्च आधारित आर्टिकल से भी सही जानकारी मिल सकती है। सोशल मीडिया या अनजान वेबसाइट को अंतिम सच न मानें। किसी भी हेल्थ एडवाइस को अपनाने से पहले विशेषज्ञ से पुष्टि करना सबसे सुरक्षित तरीका है।

सवाल- अगर पर्सनल हेल्थ एडवाइस चाहिए तो इसका सही तरीका क्या है?

जवाब- पर्सनल हेल्थ एडवाइस के लिए सीधे डॉक्टर या प्रमाणित हेल्थ एक्सपर्ट से संपर्क करना ही सही और एकमात्र तरीका है। डॉक्टर चुनने से पहले उसकी क्रेडिबिलिटी और रिव्यू देखें।

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