Friday, 17 April 2026
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आशा भोंसले का 60 साल पुराना वह गाना, जिसने बरेली को दी ‘झुमका सिटी’ की पहचान, पिता से जुड़ा खास नाता


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Asha Bhosle Bareilly Song: बरेली को झुमका सिटी के रूप में असल पहचान तब मिली, जब आशा भोंसले के एक संगीत ‘झुमका गिरा रे’ ने रिकार्ड बना दिया. आइए जानते हैं कि आखिर आशा भोंसले का बरेली से क्या नाता था.

बरेली: बरेली जिसे आज झुमका सिटी के नाम से जाना जाता है, अपनी एक खास सांस्कृतिक पहचान के कारण पूरे देश और दुनिया में प्रसिद्ध हो चुका है. इस पहचान को सबसे बड़ा विस्तार मिला मशहूर गीत “झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में” से, जिसे आशा भोंसले ने अपनी आवाज दी. इस गीत के लोकप्रिय होते ही बरेली का नाम हर जुबान पर आ गया और यह शहर एक नई पहचान के साथ उभरकर सामने आया.

वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. राजेश कुमार शर्मा बताते हैं कि यह गीत भले ही फिल्मी रूप में प्रसिद्ध हुआ, लेकिन इसकी जड़ें रोहिलखंड के लोकगीतों में पहले से मौजूद थीं. अलग-अलग गायकों ने इस लोकधुन को अपने-अपने अंदाज में गाया, लेकिन आशा भोंसले की आवाज ने इसे अमर बना दिया. इसके बाद से बरेली को झुमका सिटी के रूप में पहचान मिलने लगी और यह शहर सांस्कृतिक मानचित्र पर और अधिक मजबूत हो गया. संगीत की बात करें तो रोहिलखंड का रामपुर सहसवान घराना भी भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है.

अमान खान से आशा भोंसले के पिता ने ली थी संगीत शिक्षा
इसी घराने से जुड़े उस्तादों ने कई महान कलाकारों को प्रशिक्षित किया. बताया जाता है कि अमान खान साहब जैसे उस्तादों से आशा भोंसले के पिता ने संगीत की शिक्षा ली थी. वहीं मुस्तफा खान साहब ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लता मंगेशकर, आशा भोंसले और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को संगीत सिखाया.

भारतीय सिनेमा के लिए एक अमूल्य योगदान
डॉ. शर्मा यह भी कहते हैं कि भले ही समय के साथ कलाकार हमारे बीच नहीं रहते, लेकिन उनका काम हमेशा जीवित रहता है. आशा भोंसले ने अपने करियर में लगभग तेरह हजार गीत गाए, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है और भारतीय सिनेमा के लिए एक अमूल्य योगदान है. यहां लता मंगेशकर को उनके मधुर और शांत गीतों के लिए जाना जाता है. वहीं आशा भोंसले ने पार्टी सॉन्ग, गजल, पॉप और कई तरह के विविध गीतों में अपनी अलग पहचान बनाई. आज भी जब “झुमका गिरा रे” बजता है, तो बरेली का नाम गर्व के साथ लिया जाता है. यह गीत न केवल एक मनोरंजन का साधन है, बल्कि बरेली की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुका है. जो आने वाली पीढ़ियों तक इसी तरह याद किया जाता रहेगा.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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