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Selenium Mineral Benefits; Anti Aging Health Tips


4 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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हर शख्स की चाहत होती है कि वह हमेशा सुंदर और जवान दिखे। चमकदार स्किन और लंबे-काले बाल भला किसे नहीं पसंद हैं? इसके लिए सेलेनियम बेहद जरूरी मिनरल है।

यह एक एंटी-एजिंग तत्व है, जो हॉर्मोन संतुलन, मजबूत इम्यून सिस्टम और हेल्दी कोशिकाओं को लिए भी बेहद जरूरी है। यह डीएनए को भी सुरक्षित रखता है। इसकी कमी से शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस, इंफ्लेमेशन और कई गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ सकता है।

शरीर कोई भी मिनरल स्वयं नहीं बनाता है, यह सिर्फ कैल्शियम, आयरन जैसे कुछ मिनरल्स को छोड़कर बाकी को बहुत दिन तक स्टोर भी नहीं कर सकता है। इसलिए इसे डेली डाइट में शामिल करना जरूरी होता है। संतुलित और तरह-तरह के फूड्स से भरपूर डाइट से इसकी पूर्ति हो सकती है।

इसलिए फिजिकल हेल्थ में आज जानेंगे कि सेलेनियम क्या है। साथ ही जानेंगे कि-

  • शरीर के किन बुनियादी कामों के लिए सेलेनियम जरूरी है?
  • इसकी कमी से क्या नुकसान हो सकते हैं?
  • सेलेनियम की पूर्ति के लिए क्या खाना चाहिए?

सवाल- सेलेनियम क्या है?

जवाब- सेलेनियम एक ट्रेस मिनरल है। इसका मतलब ऐसा मिनरल, जिसकी शरीर को बहुत थोड़ी सी मात्रा में जरूरत होती है। हालांकि, यह स्वस्थ रहने के लिए जरूरी मिनरल है।

सवाल- सेलेनियम शरीर के लिए कितना जरूरी है?

जवाब- शरीर के संतुलित तरीके से काम करने के लिए सेलेनियम बेहद जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट है।

  • यह कोशिकाओं को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस (कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए जिम्मेदार) से बचाता है।
  • यह इम्यून सिस्टम मजबूत करता है।
  • हॉर्मोन्स को बैलेंस रखने में मदद करता है।
  • खासतौर पर थायरॉइड हॉर्मोन बनाता और उसे एक्टिव रखता है।
  • यह शरीर में इंफ्लेमेशन कम करता है।
  • कोशिकाओं की रिपेयर और संतुलित ग्रोथ में भी मदद करता है।

सवाल- सेलेनियम शरीर में किन बुनियादी कामों के लिए जरूरी है?

जवाब- सेलेनियम शरीर के कई बुनियादी कामों के लिए महत्वपूर्ण मिनरल है।

  • यह थायरॉइड हॉर्मोन को संतुलित रखने में मदद करता है, जिससे शरीर एनर्जेटिक बना रहता है।
  • यह डीएनए (DNA) बनाने में और कोशिकाओं की सही ग्रोथ में मदद करता है।
  • फर्टिलिटी हेल्थ के लिए बेहद जरूरी मिनरल है।
  • इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में मदद करता है।
  • जरूरी बॉडी प्रोटीन बनाने में मदद करता है।
  • खराब प्रोटीन को शरीर से निकालने में मदद करता है।
  • इससे कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं और शरीर बेहतर तरीके से काम करता है।

सवाल- सेलेनियम की कमी से क्या समस्याएं हो सकती हैं?

जवाब- इसकी कमी होने पर समय से पहले बुढ़ापा नजर आने लगता है। इससे स्किन रूखी हो जाती है और झुर्रियां पड़ जाती हैं। बाल समय से पहले रूखे, बेजान और सफेद होने लगते हैं। इससे होने वाली सभी समस्याएं ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या सेलेनियम वाकई एंटी एजिंग है। यह कैसे काम करता है?

जवाब- हां, सेलेनियम एक एंटी-एजिंग न्यूट्रिएंट है। यह ऐसे काम करता है-

  • यह शरीर में बने फ्री रेडिकल्स को कम करता है।
  • अगर फ्री रेडकिल्स बढ़ जाएं तो सेल्स डैमेज हो सकती हैं और बुढ़ापा जल्दी नजर आने लगता है।
  • यह कोशिकाओं को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम्स को एक्टिव करता है।
  • यह इंफ्लेमेशन कम करने और स्किन को अल्ट्रा-वायलेट किरणों से हुए डैमेज से बचाता है।

सवाल- सेलेनियम किन-किन बीमारियों का जोखिम कम करता है?

जवाब- सेलेनियम शरीर को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन से बचाकर कुछ बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

  • यह बीमारियों और संक्रमण से लड़ने की क्षमता को मजबूत करता है।
  • यह थायरॉइड हॉर्मोन को संतुलित रखने और थायरॉइड इंफ्लेमेशन का जोखिम कम करता है।
  • हार्ट मसल्स और ब्लड वेसल्स को ऑक्सिडेटिव डैमेज से बचाकर हार्ट डिजीज का खतरा कम कर सकता है।
  • यह ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन घटाकर सेल्स डैमेज से बचाता है।
  • सेलेनियम स्पर्म्स क्वालिटी और सक्रियता बेहतर रखने में मदद करता है।
  • यह याददाश्त और को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
  • इंफ्लेमेशन कम करके हड्डियों और जोड़ों की हेल्थ को सपोर्ट करता है।
  • यह स्किन को फ्री रेडिकल्स से बचाकर झुर्रियों और बालों की कमजोरी के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
  • सेलेनियम कोशिकाओं की रिपेयर प्रक्रिया को सपोर्ट करता है।

सवाल- एक स्वस्थ वयस्क को रोज कितने सेलेनियम की जरूरत होती है?

जवाब- एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को रोजाना लगभग 55 माइक्रोग्राम सेलेनियम की जरूरत होती है।

  • प्रेग्नेंसी के दौरान यह जरूरत बढ़कर करीब 60 माइक्रोग्राम हो जाती है, जबकि स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लगभग 70 माइक्रोग्राम सेलेनियम लेना जरूरी होता है।
  • यह मात्रा शरीर के सामान्य कार्य, इम्यूनिटी और हॉर्मोन संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त मानी जाती है। बहुत ज्यादा मात्रा में सेलेनियम लेना नुकसानदायक हो सकता है।
  • डॉ. खाजी जावेद के अनुसार रोजाना 400 माइक्रोग्राम से ज्यादा सेलेनियम लेना स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए।

सवाल- किन लोगों में सेलेनियम की कमी का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- सेलेनियम की कमी का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है, जो जिन इलाकों की मिट्टी में सेलेनियम की मात्रा कम होती है। ऐसी जगह उगने वाली फसलों में भी सेलेनियम कम होता है।

  • किडनी की गंभीर बीमारी वाले लोग, जिन्हें डायलिसिस की जरूरत होती है, उनमें भी इसकी कमी का जोखिम बढ़ सकता है।
  • एचआईवी (HIV) से प्रभावित लोगों में भी सेलेनियम स्तर कम पाया गया है।
  • जो लोग भोजन के लिए बहुत सीमित फूड्स पर निर्भर रहते हैं, उन्हें इसकी कमी की आशंका अधिक होती है।

सवाल- सेलेनियम की पूर्ति के लिए डाइट में किन फूड्स को शामिल करना जरूरी है?

जवाब- संतुलित डाइट से शरीर को जरूरी सेलेनियम मिल जाता है। समुद्री मछलियां जैसे टूना, सार्डिन और झींगा इसका सबसे अच्छा सोर्स हैं। यह अंडे और चिकन में भी मिलता है।

शाकाहारी लोगों के लिए साबुत अनाज, ब्राउन राइस, दालें, बीन्स और दूध-दही अच्छे विकल्प हो सकते हैं। सेलेनियम के अच्छे सोर्स ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या सेलेनियम की पूर्ति भोजन से हो सकती है या सप्लीमेंट की भी जरूरत पड़ती है?

जवाब- अगर संतुलित डाइट लें तो सेलेनियम की जरूरत पूरी हो सकती है। भोजन में नट्स, सीड्स, दालें, डेयरी प्रोडक्ट्स और हरे पत्ते वाली सब्जियां शामिल करना फायदेमंद है।

सप्लीमेंट की जरूरत उन लोगों को पड़ती है, जिन्हें कोई हेल्थ प्रॉब्लम है। ये याद रखें कि डॉक्टर की सलाह के बिना सेलेनियम सप्लीमेंट लेना नुकसानदायक भी हो सकता है।

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