Friday, 17 April 2026
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पिता बनाना चाहते थे इंजीनियर, बेटे ने अधूरी छोड़ दी थी IIT प्रवेश परीक्षा, धुरंधर में निभाया यादगार किरदार


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Rakesh Bedi IIT Story: चर्चित मूवी धुरंधर में जमील जमाली का किरदार निभाने वाले दिग्गज अभिनेता राकेश बेदी की सफलता की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. क्या आप जानते हैं कि उन्होंने सिर्फ 7 सवाल हल करने के बाद आईआईटी प्रवेश परीक्षा छोड़ दी थी? जानिए आखिर क्यों उन्होंने इंजीनियरिंग के बजाय अभिनय को चुना और कैसे बने इंडस्ट्री के ‘धुरंधर’ कलाकार.

पिता बनाना चाहते थे इंजीनियर, बेटे ने अधूरी छोड़ दी थी IIT प्रवेश परीक्षाZoom

Rakesh Bedi IIT Exam Story: राकेश बेदी 7 सवाल हल करके परीक्षा केंद्र से बाहर चले गए थे

नई दिल्ली (Rakesh Bedi IIT Story). आईआईटी का नाम सुनते ही सबकी आंखें चमक उठती हैं. इसे सफलता का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी ने बीच परीक्षा में सिर्फ इसलिए पेपर छोड़ दिया हो क्योंकि उसका दिल कहीं और था? ‘धुरंधर’ में जमील जमाली का किरदार निभाने वाले राकेश बेदी ने यही किया था. वह शानदार कॉमिक टाइमिंग और बेहतरीन एक्टिंग के लिए मशहूर हैं. लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि उनके पिता उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे.

राकेश बेदी ने अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए आईआईटी की प्रवेश परीक्षा तो दी, लेकिन बीच एग्जाम में ही उन्हें अहसास हुआ कि उनका रास्ता फॉर्मूलों और मशीनों के बीच नहीं, बल्कि थिएटर की लाइट्स के बीच है. धुरंधर एक्टर राकेश बेदी ने महज 7 सवाल हल करने के बाद परीक्षा कक्ष छोड़ दिया था. यह फैसला लेना आसान नहीं था. लेकिन उनकी हिम्मत और जुनून ने उन्हें आज उस मुकाम पर पहुंचाया है, जहां वे भारतीय मनोरंजन जगत के ‘धुरंधर’ कलाकार के रूप में पहचाने जाते हैं.

पिता का सपना बनाम खुद का जुनून

राकेश बेदी का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था, जहां शिक्षा को सबसे ऊपर रखा जाता था. उनके पिता की इच्छा थी कि राकेश देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान यानी आईआईटी से बीटेक करें. किसी भी आज्ञाकारी बेटे की तरह उन्होंने तैयारी की और परीक्षा केंद्र तक भी पहुंचे. लेकिन जैसे ही उनके सामने प्रश्नपत्र आया, उनके अंदर के कलाकार ने शोर मचाना शुरू कर दिया. उन्हें अहसास हुआ कि वे एक ऐसी दौड़ में शामिल हैं, जिसका लक्ष्य उनका है ही नहीं.

एग्जाम हॉल से सीधे थिएटर तक

आईआईटी प्रवेश परीक्षा के दौरान जब अन्य उम्मीदवार कठिन सवालों से जूझ रहे थे, तब राकेश बेदी ने केवल 7 सवाल हल किए और अपनी उत्तर पुस्तिका जमा कर दी. यह पल उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट था. उन्होंने समझ लिया था कि उनकी खुशी थिएटर और कला में है. परीक्षा छोड़ने के बाद उन्होंने अभिनय की तरफ रुख किया और पुणे के ‘फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (FTII) में दाखिला लिया. यह उनके करियर की नई नींव थी.

‘चश्मे बद्दूर’ से लेकर ‘भाभी जी घर पर हैं’ तक

राकेश बेदी ने 1979 में फिल्म ‘हमार’ से अपने करियर की शुरुआत की थी, लेकिन उन्हें असली पहचान फिल्म ‘चश्मे बद्दूर’ से मिली. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. ‘ये जो है जिंदगी’ जैसे कल्ट शो से लेकर ‘श्रीमान श्रीमती’ और ‘भाभी जी घर पर हैं’ में ‘भूरे लाल’ के किरदार तक, उन्होंने हर पीढ़ी का मनोरंजन किया है. उनकी कॉमिक टाइमिंग और गंभीर किरदारों को निभाने की क्षमता उन्हें दूसरों से अलग बनाती है. धुरंधर में भी उनकी एक्टिंग की खूब तारीफ हो रही है.

राकेश बेदी की कहानी उनके लिए मिसाल है, जो सामाजिक दबाव या माता-पिता की इच्छा के कारण गलत करियर चुन लेते हैं. सफलता केवल किसी डिग्री या बड़े कॉलेज के नाम में नहीं है, बल्कि उस काम को करने में है जिससे आपको प्यार हो.

About the Author

Deepali Porwal

With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys…और पढ़ें



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