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डेब्यू फिल्म से रातों-रात स्टार बनीं एक्ट्रेस ने बताया है कि उनकी एक्टिंग जर्नी की शुरुआत थिएटर से हुई थी. फिल्मों और मॉडलिंग में आने से पहले थिएटर ने ही उन्हें किरदारों को समझने और सहज अभिनय की बारीकियां सिखाईं. हालांकि एक गंभीर कार एक्सीडेंट के कारण उनका फिल्मी करियर समय से पहले खत्म हो गया और उन्हें 29 दिनों तक कोमा में रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. एक्ट्रेस फिलहाल एक योग टीचर और लेखिका के रूप में एक्टिव हैं और अपने फाउंडेशन के जरिये समाज सेवा कर रही हैं.
नई दिल्ली: 90 के दशक की मशहूर एक्ट्रेस ने हाल में सोशल मीडिया पर अपनी एक पुरानी और यादगार तस्वीर शेयर की. उन्होंने तस्वीर के साथ अपने जीवन के उन अनछुए पहलुओं को दुनिया के सामने रखा है, जिनसे बहुत कम लोग वाकिफ हैं. उन्होंने बताया कि ग्लैमर की दुनिया की चकाचौंध में आने से पहले उनकी असल पहचान कहीं और बन रही थी. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)
हम ‘आशिकी’ फेम एक्ट्रेस अनु अग्रवाल की बात कर रहे हैं, अनु का कहना है कि भले ही दुनिया उन्हें उनकी सुपरहिट फिल्मों और मॉडलिंग के सुनहरे दिनों के लिए याद करती हो, लेकिन उनके अभिनय की मजबूत नींव थिएटर में रखी गई थी. रंगमंच की उस दुनिया ने उन्हें सिखाया कि अभिनय केवल संवाद बोलना नहीं, बल्कि भावनाओं को महसूस करना है. उन्होंने फिल्मों में आने से काफी पहले ही खुद को एक कलाकार के रूप में ढाल लिया था.(फोटो साभार: IMDb)
अनु अग्रवाल को थिएटर में बिताए गए उन दिनों ने जीवन के प्रति एक नया नजरिया दिया. उन्होंने वहां किसी किरदार की गहराई में उतरना, इंसानी स्वभाव के कई रंगों को बारीकी से परखना और बिना किसी झिझक के कैमरे या दर्शकों के सामने सहज अभिनय करना सीखा. वह समय उनके लिए मात्र एक सीखने का दौर नहीं था, बल्कि खुद को तराशने का एक लंबा प्रोसेस था. (फोटो साभार: IMDb)
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थिएटर के अनुभव के बाद अनु के जीवन ने एक बेहद अलग और दिलचस्प मोड़ लिया. उस समय वे समाज सेवा और वास्तविक दुनिया की पेचीदा समस्याओं को समझने की दिशा में आगे बढ़ रही थीं. उनका इरादा लोगों की मदद करना और समाज में बदलाव लाना था. वे उस समय अभिनय की दुनिया से थोड़ा दूर, जीवन की सच्चाइयों के करीब जा रही थीं. (फोटो साभार: Instagram@anusualanu)
किस्मत के पन्नों में अनु के लिए कुछ और ही शानदार लिखा था. अचानक वे एक मशहूर मैगजीन के कवर पेज पर नजर आईं और रातों-रात उन्हें ‘सुपरमॉडल’ के खिताब से नवाजा गया. पूरी दुनिया के लिए यह एक अचानक मिली सफलता की तरह था, लेकिन अनु का मानना था कि उनके अंदर छिपा हुआ कलाकार तो सालों पहले थिएटर के मंच पर ही जन्म ले चुका था. (फोटो साभार: IMDb)
यही वह आत्मविश्वास और तैयारी थी, जिसने साल 1991 में आई फिल्म ‘आशिकी’ को एक ऐतिहासिक सफलता दिलाई. राहुल रॉय के साथ उनकी केमिस्ट्री ने बड़े पर्दे पर जादू सा कर दिया था. फिल्म रिलीज होते ही वे घर-घर में एक मशहूर नाम बन गईं और उस दौर की सबसे सफल हीरोइनों की कतार में खड़ी हो गईं. हर कोई उनकी सादगी और अभिनय का कायल हो गया था. (फोटो साभार: IMDb)
एक्ट्रेस ने ईटाइम्स को बताया था, ‘आशिकी की सफलता के बाद लोगों से मुझे जो प्यार दिया, वह मेरे लिए यकीन से परे था. मैं शहर में बिल्कुल अकेली थी क्योंकि मेरे माता-पिता दिल्ली में रहते थे. जब मैं खाना खाने बाहर जाती, तो फैंस आकर मुझसे ऑटोग्राफ मांगते. लोग मेरी एक झलक पाने के लिए मेरे घर के बाहर खड़े रहते थे. मैं स्टारडम के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं इस सब पर कैसे रिएक्शन दूं या इससे कैसे निपटूं. मैंने कभी एक्ट्रेस बनने का सपना भी नहीं देखा था.’ (फोटो साभार: IMDb)
सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद एक भयानक हादसे ने अनु की पूरी दुनिया हिला कर रख दी. एक दर्दनाक कार एक्सीडेंट की वजह से अनु को 29 दिनों तक कोमा में रहना पड़ा. इस हादसे ने न सिर्फ उनकी शारीरिक स्थिति पर असर डाला, बल्कि उनके तेजी से बढ़ते फिल्मी करियर पर भी हमेशा के लिए ब्रेक लगा दिया. यह उनके जीवन का सबसे मुश्किल दौर था.(फोटो साभार: Instagram@anusualanu)
अनु अग्रवाल ने इतनी मुश्किलों के बावजूद हार नहीं मानी और आज वे एक योग गुरु और जानी-मानी लेखिका के रूप में सम्मानजनक जीवन जी रही हैं. वे अपने ‘अनु अग्रवाल फाउंडेशन’ के जरिये लगातार समाज के कल्याण के लिए काम कर रही हैं. आज पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि थिएटर के उन्हीं दिनों ने उन्हें जिंदगी की जंग लड़ने का हौसला दिया था. (फोटो साभार: IMDb)
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