Friday, 17 April 2026
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वो कल्ट गाना, मोहम्मद रफी ने बनाया एवरग्रीन ब्लॉकबस्टर, जीतेंद्र को दी अमर पहचान, आज भी गाती है पूरी दुनिया


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Asha bhosle Lata and Usha mangeshkar Song: आशा भोसले-लता मंगेशकर और ऊषा मंगेशकर ने बॉलीवुड इंडस्ट्री को कई सदाबहार नगमें दिए हैं. 57 साल पहले आई एक फिल्म में तीनों बहनों के गाने थे. इस फिल्म में गाए तीनों बहनों के गाने आज भी बहुत पॉप्युलर है. इस फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था और बेस्ट म्यूजिक का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीता था. फिल्म की कहानी बहुत शानदार थी. फिल्म-म्यूजिक कालजयी साबित हुआ. यह फिल्म उन गिनी-चुनी फिल्मों में शामिल है जिसमें आशा-लता और ऊषा मंगेशकर के गाने थे. मोहम्मद रफी ने इस फिल्म में 3 सोलो सॉन्ग गाए थे. उनके दो गाने हिंदी सिनेमा के इतिहास के एवरग्रीन गाने में शुमार हैं. यह फिल्म कौन सी थी, वो सदाबहार गाने कौन से थे, आइये जानते हैं….

बॉलीवुड में ऐसी कुछ ही फिल्में होंगी जिसमें आशा भोसले-लता मंगेशकर और ऊषा मंगेशकर ने गाने गाए होंगे. तीनों बहनों ने एक ही फिल्म में गाने गाए हों, ऐसा दुर्लभ संयोग बहुत ही कम देखने को मिलता है. सदाबहार अभिनेता जीतेंद्र की 1969 की फिल्म ‘जीने की राह’ में यह संभव हुआ था. इस फिल्म में एक गाना आशा भोसले और ऊषा मंगेशकर ने मिलकर रिकॉर्ड किया था. लता मंगेशकर का एक सोलो सॉन्ग था जिसके लिए उन्हें बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. मोहम्मद रफी के 3 सोलो गाने थे. आइये जानते हैं इस फिल्म से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स……

कुछ फिल्मों का म्यूजिक इतना यादगार होता है कि साल दर साल भी जेहन में बसा रहता है. 25 अप्रैल 1969 को ऐसी की एक फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी जिसका सदाबहार म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने बनाया था. इस फिल्म का नाम ‘जीने की राह’ था जिसकी गिनती हिंदी सिनेमा के इतिहास की बेस्ट म्यूजिकल मूवी में होती है. फिल्म में तीनों बहनों आशा भोसले-ऊषा मंगेशकर और लता मंगेशकर ने गाने गाए थे. यह फिल्म 1953 की एक तेलुगू फिल्म का रीमेक थी. फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में जीतेंद्र, तनूजा और संजीव कुमार थे. डायरेक्टर-प्रोड्यूसर एल.वी प्रसाद थे. एल.वी प्रसाद ने ही जीतेंद्र का करियर संवारा.

फिल्म के डायलॉग मुखराम शर्मा ने लिखे थे. फिल्म का कालजयी म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने तैयार किया था. फिल्म के अमर गाने गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे. फिल्म का म्यूजिक ही उसका बैकबोन था. सदाबहार म्यूजिक ने फिल्म में चार चांद लगा दिए. हर गाना असाधारण था. गानों ने फिल्म से और जुड़ाव पैदा किया. तीन गाने मोहम्मद रफी ने सोलो गाए थे. ये गाने थे : ‘एक बंजारा गाए, जीवन का राग सुनाए’, ‘आ मेरे हमजोली आ, खेलें आंख मिचोली आ’, और ‘आने से उसके आए बहार’. ‘आने से उसके आए बहार’ गाना फिल्म में तीन बार चलता है.

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यह भी दुर्लभ संयोग है कि फिल्म में आशा भोसले-लता मंगेशकर और ऊषा मंगेशकर के गाने थे. लता मंगेशकर ने ‘आप मुझे अच्छे लगने लगे’ सोलो सॉन्ग बहुत ही खूबसूरती से गाया. इस गाने के लिए उन्हें बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. शुरुआत में लता मंगेशकर ने इस अवॉर्ड को लेने से इनकार कर दिया था. उनका कहना था कि यह अवॉर्ड दूसरे कलाकारों को भी दिया जाए. बाद में 1994 में लता को ‘हम आपके हैं कौन’ के लिए फिल्मफेयर स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड दिया गया था. इस फिल्म में उन्होंने 14 गाने गाए थे. फिल्म में एक गाना ‘चंदा को ढूंढने सभी तारे निकल पड़े’ को आशा भोसले-ऊषा मंगेशकर और हेमलता ने गाया था.

फिल्म में जीतेंद्र का काम बहुत शानदार था. उनके चेहरे की मासूमियत ने दर्शकों का दिल जीत लिया था. जीतेंद्र ने फिल्म में एक विवाहित बेरोजगार युवक की भूमिका निभाई थी जो मजबूरी में गैर-विवाहित होने का नाटक करता है. संजीव कुमार ने छोटी सी भूमिका में छाप छोड़ी. तनूजा खूबसूरत तो थी हीं, बतौर एक्ट्रेस उनका काम बहुत बढ़िया था.

जीतेंद्र ने फिल्म साइन करने के बाद छोड़ दी थी. उन्हें ‘अभिनेत्री’ फिल्म में हेमा मालिनी के साथ काम करने का मौका मिल रहा था. वो बहुत खुश हुए लेकिन हेमा मालिनी ने प्रोड्यूसर पर दबाव डाला और शशि कपूर के साथ फिल्म साइन की. जीतेंद्र ने ठगा सा महसूस किया.

जीतेंद्र फिर से प्रोड्यूसर एलवी प्रसाद के पास लौटे और दोबारा फिल्म में काम करने का अनुरोध किया. प्रोड्यूसर एलवी प्रसाद जीतेंद्र को बहुत चाहते थे. भले इंसान थे. उन्होंने जीतेंद्र को फिल्म में रख लिया. यह भी दिलचस्प है कि जिस जीतेंद्र को शुरुआत में हेमा मालिनी ने फिल्म से निकलवाया, बाद में उन्हीं को दिल दे बैठी थीं. दोनों की शादी हो रही थी लेकिन ऐन मौके पर जीतेंद्र की गर्लफ्रेंड शोभा कपूर धर्मेंद्र को लेकर पहुंच गई थीं. और यह शादी टूट गई. मजेदार बात यह है कि हेमा मालिनी ने शादी तुड़वाने वाले धर्मेंद्र से विवाह किया.

‘जीने की राह’ फिल्म का बजट करीब 80 लाख रुपये था. मूवी ने 1.6 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी. यह 1969 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली 6वीं फिल्म थी. इस फिल्म ने जीतेंद्र का करियर संवार दिया.

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