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Kulthi Dal Ke Fayde; Horse Gram Pulse Health Benefits & Nutritional Value


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1 दिन पहलेलेखक: अदिति ओझा

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आजकल हर दिन कोई नई डाइट या नया ‘सुपरफूड’ ट्रेंड में रहता है। सोशल मीडिया पर भी यही चीजें ज्यादा दिखती हैं। इसलिए हमारी रसोई की कई पुरानी और सेहतमंद चीजें धीरे-धीरे पीछे छूट गई हैं। ऐसी ही एक ताकतवर, लेकिन कम चर्चित दाल ‘कुलथी की दाल’ है।

अमेरिका की नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज ने इसे भविष्य के लिए एक बेहतर और पोटेंशियल फूड माना है। यह कोई नई चीज नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी दाल है। कुलथी दाल उतनी मशहूर नहीं है, जितनी उड़द, अरहर या मूंग। लेकिन पोषण के मामले में यह उनसे कम नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे कुलथी, हुराली या ‘मद्रास ग्राम’ कहा जाता है।

ये दाल प्रोटीन और एनर्जी का बेहतरीन सोर्स है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पहले इसे रेस में दौड़ने वाले घोड़ों को खिलाया जाता था। जिससे वे मजबूत और फुर्तीले रहें। इसलिए इसे ‘हॉर्स ग्राम’ यानी घोड़ों का चना भी कहते हैं।

इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि-

  • कुलथी दाल क्या होती है?
  • कुलथी दाल के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं?
  • कुलथी दाल को अपनी डाइट में कैसे शामिल करें?

एक्सपर्ट: डॉ. अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली

सवाल- कुलथी दाल क्या है?

जवाब- कुलथी दाल को हॉर्स ग्राम के नाम से भी जाना जाता है। यह एक प्रकार की दाल है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाती है यानी यहां की जलवायु इसे उगाने के लिए अनुकूल है। इसकी सूखी और सख्त बनावट के साथ स्वाद और खुशबू इसे खास बनाते हैं। इसलिए कई पारंपरिक व्यंजनों का यह एक अहम हिस्सा होती है। कुलथी दाल को दुनिया की सबसे अधिक प्रोटीन-रिच दालों में गिना जाता है।

सवाल- कुलथी दाल कहां होती है?

जवाब- कुलथी दाल भारत के कई हिस्सों में होती है, खासतौर पर पहाड़ी और सूखे इलाकों में होती है। यह उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बहुत कॉमन है, जहां इसे पारंपरिक तौर पर खाया जाता है। इसके अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी कुलथी की खेती होती है। दक्षिण भारत में इसे ‘हॉर्स ग्राम’ कहा जाता है। इसे उगाने के लिए बहुत खाद-पानी की जरूरत नहीं होती है, इसलिए यह दाल ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में लंबे समय से फूड का हिस्सा रही है।

सवाल– कुलथी दाल की न्यूट्रिशनल वैल्यू कितनी होती है?

जवाब- कुलथी दाल पोषण से भरपूर होती है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर के साथ कई जरूरी मिनरल्स भी अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं। 100 ग्राम कुलथी दाल की न्यूट्रिशनल वैल्यू ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कुलथी दाल में कौन-कौन से विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं?

जवाब- कुलथी दाल मिनरल-रिच दाल होती है। इसमें खासतौर पर आयरन, कैल्शियम और फॉस्फोरस की भरपूर मात्रा होती है। इसके अलावा इसमें B-कॉम्प्लेक्स विटामिन्स भी पाए जाते हैं, जो एनर्जी मेटाबॉलिज्म के लिए जरूरी हैं। ग्राफिक देखिए-

अगर हम 100 ग्राम कच्ची कुलथी दाल लेते हैं, तो रोजाना की मिनरल जरूरत का कितना हिस्सा पूरा होता है, ग्राफिक में देखिए।

सवाल- कुलथी दाल के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं?

जवाब- कुलथी दाल एक पोषक से भरपूर दाल है, जिसे सेहत के लिहाज से खास माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, फाइबर और जरूरी मिनरल्स शरीर को ताकत देने के साथ-साथ कई बीमारियों से बचाव में मदद करते हैं। नियमित रूप से कुलथी दाल का सेवन मसल्स की मजबूती, बेहतर पाचन और एनर्जी लेवल बनाए रखने में सहायक होता है। यही वजह है कि इसे बैलेंस्ड डाइट का अहम हिस्सा माना जाता है।

सवाल- रोज कितनी मात्रा में कुलथी दाल खानी चाहिए?

जवाब- सामान्य तौर पर एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति के लिए रोज 25–30 ग्राम कुलथी दाल पर्याप्त मानी जाती है, जो पकने के बाद लगभग एक छोटी कटोरी के बराबर होती है। जिन लोगों को किडनी स्टोन, एसिडिटी की समस्या है, उन्हें मात्रा और फ्रीक्वेंसी डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से पूछकर तय करनी चाहिए।

सवाल- किन बीमारियों में कुलथी दाल फायदेमंद हो सकती है?

जवाब- कुलथी दाल को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधि माना गया है। इसमें कई पोषक तत्व होते हैं, जो कई गंभीर बीमारियों में फायदेमंद होते हैं। ग्राफिक से समझते हैं किन बीमारियों में कुलथी दाल फायदेमंद होती है-

सवाल- कुलथी दाल किन्हें नहीं खाना चाहिए?

जवाब- कुलथी दाल की तासीर गर्म होती है। इसलिए कुछ मेडिकल कंडीशन में इसका सेवन हानिकारक हो सकता है। ग्राफिक से समझते हैं किन्हें ये दाल नहीं खाना चाहिए-

सवाल- कुलथी दाल को अपनी डाइट में कैसे शामिल करें?

जवाब- कुलथी दाल को अपनी डाइट में कई तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे धोकर रातभर भिगो दें और फिर प्रेशर कुकर में पकाकर सादा दाल, सूप या रसम की तरह खाएं।

इस तरह खाने से यह दाल आसानी से पच जाती है। कुलथी दाल को अंकुरित करके सब्जी या सलाद में भी डाला जा सकता है, जबकि कुछ जगहों पर इसे काढ़ा बनाकर पीने की परंपरा है। इसका आटा बनाकर रोटी या चीला तैयार किया जा सकता है और चावल के साथ खिचड़ी के रूप में भी यह एक पौष्टिक विकल्प है। बेहतर स्वाद और पोषण के लिए इसमें जीरा, लहसुन, हींग और हल्के मसालों का तड़का लगाया जा सकता है।

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