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Low Budget Superhit Bollywood Movies : फिल्म इंडस्ट्री में एक कहावत बहुत मशहूर है. बड़े-बड़े प्रोड्यूसर फिल्मों में पैसे गंवाते हैं लेकिन फिल्म से ही कमाते हैं. अपने सपने को पूरा करने के लिए डायरेक्टर-प्रोड्यूसर घर-बंगला गिरवी रखकर भी फिल्में बनाते रहे हैं. कई बार कई एक्टर-एक्ट्रेस ने प्रोड्यूसर की हालत पर तरस खाते हुए फ्री में भी काम किया. 10 साल के अंतराल में बॉलीवुड में ऐसी ही तीन फिल्में बनाई गईं. इन तीनों फिल्मों में सितारों ने या तो कम पैसे लिए या फिर फ्री में काम किया. जब ये फिल्में रिलीज हुईं तो बॉक्स ऑफिस पर हल्ला मच गया. दो फिल्में ब्लॉकबस्टर निकलीं जबकि तीसरी फिल्म कल्ट क्लासिक मूवी बन गई. ये तीनों कौन सी थीं, आइये जानते हैं….

बॉलीवुड के कई प्रोड्यूसर ने आर्थिक तंगी के बीच फिल्म बनाने का सपना नहीं छोड़ा. एक फिल्म फ्लॉप हुई तो दूसरी फिल्म की स्क्रिप्ट फाइनल करने में जुट गए. कम बजट की फिल्म बनाई. कई बार प्रोड्यूसर की हालत देखकर कई बॉलीवुड सितारों ने अपनी फीस आधी कर दी. कई ने तो फ्री में भी काम किया. 1973 से 1983 के बीच तीन ऐसी ही फिल्में बनीं, जिन्हें प्रोड्यूसर ने किसी तरह बहुत ही आर्थिक तंगी के बीच बनाया. इनमें से दो फिल्में ब्लॉकबस्टर निकलीं. तीसरी फिल्म आज कल्ट क्लासिक मूवी में शामिल है. ये तीनों फिल्में थीं : बॉबी, डॉन और जाने भी दो यारो. आइये जानते हैं इन तीनों फिल्मों से जुड़े दिलचस्प पहलू…..

साल था 1973. राजेश खन्न सुपरस्टार थे. अमिताभ बच्चन जंजीर फिर से पर्दे पर ‘एंग्रीमैन’ बनकर छा गए थे. इसी साल एक ऐसी फिल्म आई जिसने सबसे ज्यादा कमाई की. यह 1973 की सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्म था. नाम था : बॉबी जिसे 28 सितंबर 1973 को रिलीज किया गया था. राज कपूर ने ‘मेरा नाम जोकर’ के नाम से फिल्म बनाई थी जो कि 1970 में पर्दे पर आई थी. फिल्म फ्लॉप हो गई. इधर, रणधीर कपूर ‘कल आज और कल’ (1971) भी फ्लॉप हो गई. ऐसे में राज कपूर कंगाली की हालत में पहुंच गए. उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक अच्छी फिल्म बनाकर कर्ज उतारने की सोची. उस दौर में राजेश खन्ना सुपरस्टार थेलेकिन उनकी फीस देने के लिए पैसे नहीं थे. राज कपूर ने ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया को लेकर फिल्म बनाने का फैसला किया. कहानी उन्हें एक कॉमिक्स से मिली थी जिसमें टीनेज गर्ल-ब्वॉय की लव स्टोरी थी. टीनेज रोमांस पर पहले कोई फिल्म नहीं आई थी.

उन्होंने राइटर जोड़ी ख्वाजा अहमद अब्बास और वीपी साठे को स्क्रिप्ट लिखने का जिम्मा सौंपा. जैनेंद्र जैन से स्क्रीनप्ले लिखवाया. इस तरह से बॉबी फिल्म की रुपरेखा तैयार हुई. राज कपूर यह फिल्म कम से कम पैसे में बनाना चाहते थे. उन्होंने फिल्म में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों का साथ लिया. फिल्म में प्रेमनाथ-प्रेम चोपड़ा और प्राण को लिया. प्रेमनाथ-प्रेम चोपड़ा उनके रिश्तेदार थे. प्राण गहरे दोस्त थे. उन्होंने सिर्फ एक रुपये में यह फिल्म की थी. कहा तो यह भी जाता है कि राज कपूर ने 70 के दशक के मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला और हाजी मस्तान से भी बॉबी फिल्म बनाने के लिए पैसे लिए थे.
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फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया. फिल्म का म्यूजिक लाजवाब था. गाने सदाबहार थे. टीनेज रोमांस की झलक ने दर्शकों को दीवाना बना दिया. सिचुएशन के हिसाब से फिल्म के गानों ने दर्शकों को सिनेमाघर तक खींच लाने में मदद की. फिल्म में कुल 8 गाने रखे गए थे. सभी गाने एक से बढ़कर एक थे. इन गानों में ‘मैं शायर तो नहीं, अंखियों को रहने दो, हम-तुम एक कमरे में बंद हों, झूठ बोले कौआ काटे और ना मांगू सोना चांदी’ सॉन्ग आज भी उतने ही पॉप्युलर हैं. महज 30 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने .90 करोड़ का कलेक्शन किया. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई. राज कपूर ने इस फिल्म की कमाई से अपना पूरा कर्ज उतार दिया था. फिल्म ब्लॉकबस्टर रही तो राज कपूर ने प्राण साहब को 1 लाख का चेक भिजवाया. प्राण उन दिनों तीन लाख रुपये लेते थे. उन्होंने गुस्से में चेक लौटा दिया. फिर कभी राज कपूर की फिल्म में काम नहीं किया. बॉबी फिल्म के साथ ही दोनों की दोस्ती टूट गई.

इस लिस्ट में दूसरा नाम अमिताभ बच्चन-जीनत अमान की 12 मई 1978 को रिलीज हुई फिल्म डॉन का है. इस फिल्म के बनने की कहानी बहुत दुखद है. प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी ने 1972 में ‘जिंदगी-जिंदगी’ नाम से एक फिल्म बनाई थी. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही. नरीमन 12 लाख के कर्जे में डूब गए. अमिताभ बच्चन-जीनत अमान-प्राण ने उन्हें एक और फिल्म बनाने का सुझाव दिया. तीनों ने नरीमन से उनकी फिल्म में फ्री में काम करने का वादा किया. नरीमन ने सलीम-जावेद से स्क्रिप्ट ली. इस रिजेक्टेड स्क्रिप्ट पर कोई भी प्रोड्यूसर फिल्म नहीं बनाना चाहता था. यह स्क्रिप्ट ‘डॉन’ फिल्म की थी.

डॉन फिल्म को डायरेक्ट करने के लिए चंद्रा बारोट ने हामी भर दी. किस्मत का खेल देखिए कि फिल्म के निर्माण के दौरान प्रोड्यूसर नरीमन का निधन हो गया. वो हादसे का शिकार हो गए थे. डायरेक्टर चंद्रा बारोट ने फिल्म को पूरा करने का बीड़ा उठाया. उन्होंने अपनी बहन से 40 हजार उधार लेकर फिल्म पूरी की. सबसे दिलचस्प बात यह हि कि पूरे एक हफ्ते तक फिल्म को दर्शक नहीं मिले. फिर अचानक थिएटर के बाहर दर्शकों की भीड़ उमड़ने लगी.

डॉन फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन को बेस्ट एक्टर का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था.अमिताभ ने अपना अवॉर्ड प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी को समर्पित किया था. किशोर कुमार को ‘खइके पान बनारस वाला’ जबकि आशा भोसले को ‘ये मेरा दिल, प्यार का दीवाना’ के लिए फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था. बहुत कम लोग जानते हैं कि डॉन फिल्म का कहानी शम्मी कपूर की 1962 की फिल्म ‘चाइना टाउन’ से इंस्पायर्ड थी. इस फिल्म के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर शक्ति सामंत थे. फिल्म का क्लाइमैक्स में एक पार्क में नकली कब्रगाह के बीच एक्शन सीन फिल्माए गए थे.

साल 1983 में लो बजट की एक ऐसी यादगार फिल्म आई, आज भी पूरा जमाना इसका मुरीद है. सरकारी भ्रष्टाचार की कलंक-कथा की कलई खोलने वाली इस फिल्म को देखकर आज भी लोग पेट पकड़-पकड़कर हंसते हैं. इस फिल्म का नाम था : जाने भी दो यारो जिसे कुंदन शाह ने डायरेक्ट किया था. उन्होंने यह फिल्म सुधीर मिश्रा के साथ मिलकर प्रोड्यूस की थी. फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, रवि बासवानी, भक्ति बार्वे, सतीश शाह, ओम पुरी, पंकज कपूर, सतीश कौशिक, नीना गुप्ता लीड रोल में थे. कुंदन शाह के पास इस फिल्म को बनाने के लिए पैसे नहीं थे. उन्होंने नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की मदद से महज 7 लाख रुपये जुटाए और ऐसी नायाब फिल्म बना दी, जो हिंदी सिनेमा की कल्ट क्लासिक फिल्म में शामिल है.

फिल्म के क्लाइमेक्स में महाभारत का सीन इस मूवी को कालजयी फिल्म बना देता है. इस सीन में सभी कलाकारों का अपीयरेंस, उनके डायलॉग, बॉडी मूवमेंट, सबकुछ इतना परफेक्ट है, जो फिल्म को एक अलग स्तर प्रदान करता है. इस दौरान फिल्म का डायलॉग ‘मैंने द्रौपदी के चीरहरण का आइडिया ड्रॉप कर दिया है’ या फिर ‘शांत गदाधारी भीम शांत…’ जैसे डायलॉग सामाजिक विद्रूपता पर सोचने को मजबूर कर देते हैं. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई थी लेकिन आज इसकी गिनती कल्ट क्लासिक मूवी में होती है.
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