Friday, 17 April 2026
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न राजेश खन्ना, न दिलीप कुमार, भारत का पहला सुपरस्टार, शूटिंग से पहले पीता था शराब, 42 की उम्र में हुई थी मौत


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फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई सितारे हुए जिनका नाम लेते ही फिल्में हों या गाने ऑडियंस और फैंस के दिल और दिमाग पर छा जाते हैं. दिलीप कुमार, राज कपूर, राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और सलमान खान समेत ऐसे कई सुपरस्टार रहे हैं, जो फिल्मों को अकेले अपने दम पर हिट करवाने का दम रखते हैं. लेकिन इंडस्ट्री में एक ऐसा स्टार भी हुआ, जो इन सभी पर भारी पड़ा.

राज कपूर, राजेश खन्ना और दिलीप कुमार जैसे स्टार्स को आज की पीढ़ी के लोग भी जानते हैं. लेकिन एक ऐसे सुपरस्टार को बहुत ही कम लोग जानते होंगे, जिसने भारतीय सिनेमा की तकदीर बदल दी. अपनी अदाकारी और सिंगिंग के दम पर हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहलाए. कश्मीर से निकलकर मुंबई में अपना सिक्का चलाया, लेकिन अंत दर्दनाक रहा. (फोटो साभारः एआई इमेज इन्हासर)

बड़े पर्दे पर शाहरुख खान और दिलीप कुमार दोनों ने देवदास का किरदार निभाया. दोनों ने अमिट छाप छोड़ी. लेकिन इससे पहले इस एक्टर ने ‘देवदास’ अपनी अदाकारी को लोहा मनवाया और हिंदी सिनेमा के टॉप पर बैठकर रूल किया. सबसे पहली ‘देवदास’ में काम करने वाले इस स्टार का नाम कुंदन लाल सहगल है. (फोटो साभारः एआई इमेज इन्हासर)

कुंदन लाल सहगल ने ‘देवदास’ के जरिए न सिर्फ एक चरित्र को अमर बनाया, बल्कि खुद को भारतीय सिनेमा का पहला सुपरस्टार साबित किया. उनकी मेहनत, संघर्ष और संगीत की विरासत आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है. जम्मू के नवा शहर में जन्में कुंदन लाल सहगल को भारतीय फिल्म जगत का पहला सुपरस्टार माना जाता है. उनकी एक्टिंग ही नहीं आवाज भी कमाल थी. कहा जाता है कि फिल्में उनके नाम से ही सुपरहिट हो जाती थीं. संगीत की दुनिया में मेलोडी की नींव रखने वाले कलाकार के रूप में भी वह याद किए जाते हैं. (फोटो साभारः एआई इमेज इन्हासर)

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कुंदन लाल सहगल के पिता तहसीलदार थे, लेकिन घर में संगीत की कोई पारंपरिक विरासत नहीं थी. मां केसर बाई के भजनों ने बचपन से ही कुंदन के मन में सुरों का बीज बो दिया. उनकी संगीत शिक्षा किसी बड़े उस्ताद के घर पर नहीं हुई. उन्होंने सूफी संतों की दरगाहों और रामलीला के मंचों पर गाकर खुद को संगीत की दुनिया से जोड़ा. फिल्मों में आने से पहले सहगल की जिंदगी संघर्ष भरी थी. (फोटो साभारः एआई इमेज इन्हासर)

कुंदन लाल सहगल ने स्कूल छोड़कर रेलवे में टाइमकीपर के रूप में काम शुरू किया. बाद में वे टाइपराइटर कंपनी में सेल्समैन बने. इस नौकरी ने उन्हें पूरे भारत घूमने का मौका दिया. अलग-अलग जगहों की भाषाएं, संस्कृति और लोक संगीत उन्होंने अपने अंदर समेट लिया. यहीं नहीं कुछ समय के लिए उन्होंने होटल में भी काम किया. इन छोटी-छोटी नौकरियों के बीच उनका गाने का शौक कभी नहीं रुका.

1930 का दशक भारतीय सिनेमा में बोलती फिल्मों का दौर था. सहगल कोलकाता पहुंचे, जहां न्यू थिएटर्स के बीएन सरकार ने उनकी अनोखी आवाज को पहचाना. शुरुआत ‘सहगल कश्मीरी’ नाम से हुई, लेकिन असली पहचान 1935 में आई फिल्म ‘देवदास’ से मिली. शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की प्रसिद्ध कहानी ‘देवदास’ में सहगल ने मुख्य भूमिका निभाई. उनकी अभिनय और गायकी ने इस चरित्र को अमर बना दिया. फिल्म के गीत जैसे ‘बालम आए बसो मोरे मन में’ और ‘दुख के अब दिन बीतत नाहीं’ ने पूरे देश में धूम मचा दी. लोग सिर्फ सहगल के नाम पर ग्रामोफोन रिकॉर्ड खरीदने लगे. (फोटो साभारः एआई इमेज इन्हासर)

सहगल की आवाज में एक खास ‘नोजल टोन’ थी, जो भावनाओं को गहराई देती थी. शास्त्रीय संगीत के महान उस्ताद फैयाज खान भी उनकी गायकी सुनकर हैरान रह जाते थे. उन्होंने मिर्जा गालिब की गजलों को नई जान दी. ‘नुक्ताचीन है गम-ए-दिल’ और ‘आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक’ जैसी गजलें आज भी सहगल की आवाज में सुनकर दिल छू जाती हैं. सहगल की जिंदगी में शराब की लत भी एक अहम हिस्सा बन गई. रिकॉर्डिंग से पहले वे अक्सर शराब मांगते थे, जिसे वे ‘काली पांच’ कहकर पुकारते थे. संगीतकार नौशाद ने साल 1946 में आई फिल्म ‘शाहजहां’ के दौरान उन्हें बिना शराब के ‘जब दिल ही टूट गया’ गाने के लिए राजी किया. गाना रिकॉर्ड करने के बाद सहगल खुद भावुक हो गए और बोले कि बिना नशे के उनकी आवाज ज्यादा साफ और दर्द भरी लग रही थी. (फोटो साभारः एआई इमेज इन्हासर)

दुर्भाग्य से यह समझ बहुत देर से आई. शराब ने उनके लिवर को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था. मात्र 42 वर्ष की उम्र में 18 जनवरी 1947 को जालंधर में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. केएल सहगल को लता मंगेशकर अपना गुरु मानती थीं. किशोर कुमार ने जीवन भर सहगल के गीतों को रीमेक करने से इनकार किया क्योंकि वे उन्हें गुरु की तरह सम्मान देते थे. आज भी जालंधर में केएल सहगल मेमोरियल हॉल उनकी यादों को संजोए हुए है.(फोटो साभारः एआई इमेज इन्हासर)

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