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बॉलीवुड के इतिहास में गोविंदा एक ऐसी हस्ती हैं जिन्होंने ‘हीरो नंबर 1’ के तौर पर दर्शकों के दिलों पर राज किया. 90 के दशक में बॉक्स ऑफिस उनके इशारों पर नाचता था और उनके साथ काम करने वाले डायरेक्टर्स, को-स्टार्स और सिंगर्स की किस्मत रातोंरात चमक जाती थी. डेविड धवन की फिल्मों से लेकर कादर खान के डायलॉग्स तक, गोविंदा जिस भी चीज को छूते थे, वह सोना बन जाती थी. लेकिन आज, अजीब बात है कि वही ‘अनलकी’ सुपरस्टार जिसने इतने सारे लोगों का करियर बनाया, एक फिल्म के लिए तरस रहा है.
नई दिल्ली. एक समय था जब बॉलीवुड का मतलब ‘खान’ तिकड़ी नहीं, बल्कि सिर्फ गोविंदा था. उनका डांस, उनकी कॉमिक टाइमिंग और उनके रंगीन कपड़े इतने जादुई थे कि रिक्शा चलाने वालों से लेकर मल्टीप्लेक्स ऑडियंस तक, हर कोई उनका दीवाना था. गोविंदा सिर्फ एक एक्टर नहीं थे, बल्कि वह एक खुद में ही एक इंडस्ट्री थे. लेकिन, देखते ही देखते उनका करियर तबाह हो गया और फिर उनकी बॉलीवुड में वापसी बहुत मुश्किल हो गई. (तस्वीर बनाने में AI की मदद ली गई है.)
डायरेक्टर डेविड धवन ने गोविंदा के करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. लेकिन सच तो यह है कि गोविंदा ने ही उन्हें ‘कॉमेडी का किंग’ बनाया. ‘कुली नंबर 1’, ‘राजा बाबू’ और ‘साजन चले ससुराल’ जैसी लगातार 17-18 हिट फिल्मों के साथ इस जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर राज किया. गोविंदा की मौजूदगी ने डेविड धवन को उस दौर का सबसे महंगा और सफल डायरेक्टर बना दिया. इसलिए शायद यह कहना भी गलत नहीं होगा कि आज भले ही डेविड धवन बड़े बजट की फिल्में बना रहे हैं, लेकिन उस सफलता की नींव गोविंदा की कोशिशों से रखी गई थी.
कादर खान के डायलॉग और शक्ति कपूर की कॉमिक विलेन वाली इमेज ने गोविंदा की फिल्मों की सफलता में अहम भूमिका निभाई. गोविंदा के साथ उनके कोलेबोरेशन ने दोनों एक्टर्स को वो फेम दिलाया जो शायद ही किसी और एक्टर के साथ मिला हो. गोविंदा की टाइमिंग इतनी परफेक्ट थी कि कादर खान और शक्ति कपूर जैसे लेजेंड्स भी उनकी मौजूदगी में और भी बेहतर चमकते थे. इस तिकड़ी ने 90 के दशक में एंटरटेनमेंट को एक नई पहचान दी.
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गोविंदा की ‘नंबर 1’ सीरीज ने करिश्मा कपूर के करियर को न सिर्फ पटरी पर लाने में बड़ा रोल निभाया, बल्कि उन्हें एक बड़ा स्टार बनाया. गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया. वहीं, सुष्मिता सेन जैसी एक्ट्रेसेस को भी गोविंदा के साथ कमर्शियल सक्सेस मिली. उस जमाने की हर हीरोइन के लिए गोविंदा के साथ काम करना हिट होने की गारंटी माना जाता था.
कहा जाता है कि गोविंदा ने न सिर्फ स्क्रीन पर बल्कि रेडियो और टेप रिकॉर्डर पर भी राज किया. गोविंदा पर फिल्माए गए गानों ने आनंद-मिलिंद और नदीम-श्रवण जैसे कंपोजर्स के करियर को ऊपर उठाया. जब कुमार सानू और उदित नारायण की आवाज गोविंदा के चेहरे पर सजी, तो गाना चार्टबस्टर बन गया. चाहे वो ‘यूपी वाला ठुमका’ हो या ‘सोना कितना सोना है’, इन गानों की कामयाबी ने इन सिंगर्स को बॉलीवुड का बेताज बादशाह बना दिया.
अपने करियर के एक पड़ाव पर, जब संजय दत्त और सलमान खान एक हिट की तलाश में थे, तो गोविंदा ने उनके साथ काम किया. ‘हसीना मान जाएगी’ में संजय दत्त के साथ गोविंदा की केमिस्ट्री और ‘पार्टनर’ में सलमान खान ने इन स्टार्स को एक नई कमर्शियल इमेज दी. ‘पार्टनर’ के बाद सलमान खान का करियर ऊपर चढ़ा, जिसका बड़ा कारण गोविंदा की दमदार कॉमिक परफॉर्मेंस थी, जिसने फिल्म को ब्लॉकबस्टर बना दिया.
बड़ी अजीब बात ये है कि गोविंदा, जिन्होंने इतने सारे लोगों का करियर बनाया, अब इंडस्ट्री में अकेले पड़ गए हैं. इसके कई कारण बताए जाते हैं, जैसे- जहां उनके समय के एक्टर्स ने खुद को बदला, वहीं गोविंदा अपनी पुरानी इमेज में ही अटके रहे. इंडस्ट्री में उनके देर से आने की कहानियां आम हो गईं, जिससे बड़े प्रोड्यूसर्स ने उनसे दूरी बना ली.
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