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बॉलीवुड के संजू बाबा यानी संजय दत्त का फिल्मी सफर किसी रोमांचक थ्रिलर से कम नहीं रहा है. चार दशकों से भी लंबे करियर में उन्होंने साबित किया है कि वह केवल एक हीरो ही नहीं, बल्कि जरूरत बनने पर विलेन भी बन सकते हैं. संजय दत्त की शख्सियत ऐसी है कि उन्होंने पर्दे पर खलनायक बनकर नफरत भी बटोरी और ‘मुन्ना भाई’ बनकर लोगों की जादू की झप्पी पाई है. वह हर किरदार में छा जाते हैं.
नई दिल्ली. संजय दत्त ने 90 के दशक में ‘थानेदार’ और ‘खलनायक’ जैसी फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर राज किया, वहीं ‘साजन’ जैसी फिल्म से अपनी रोमांटिक छवि का लोहा मनवाया. करियर के दूसरे पड़ाव में ‘मुन्ना भाई’ सीरीज ने उन्हें घर-घर का चहेता बना दिया, तो ‘अग्निपथ’ और ‘केजीएफ 2’ में उनके खूंखार अवतार ने विलेन के किरदार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. आज भी उनका स्वैग और स्क्रीन प्रेजेंस दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच लाने का दम रखती है. आज हम आपको संजय दत्त की हिट फिल्मों के बारे में बताते हैं.
थानेदार: 1990 में रिलीज हुई थानेदार संजय दत्त और माधुरी दीक्षित की सबसे यादगार फिल्मों में से एक है. इसमें संजय दत्त ने बिरजू का किरदार निभाया था, जो परिस्थितियों के कारण अपराध की दुनिया में कदम रखता है, लेकिन दिल का साफ है. फिल्म का गाना ‘तम्मा तम्मा लोगे उस दौर का सबसे बड़ा चार्टबस्टर बना और आज भी रीमिक्स के रूप में उतना ही पॉपुलर है. इस फिल्म ने संजय दत्त को एक्शन के साथ-साथ डांस और स्टाइल के मामले में भी नंबर वन बना दिया था.
खलनायक: सुभाष घई की यह फिल्म संजय दत्त के सबसे यादगार परफॉर्मेंस में से एक है. इसमें उन्होंने बल्लू नाम के एक अपराधी का किरदार निभाया था, जो अंदर से भावुक है. फिल्म का गाना नायक नहीं खलनायक हूं मैं उनकी रील और रियल लाइफ इमेज पर एकदम सटीक बैठा. जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित के साथ उनकी केमिस्ट्री और फिल्म का जबरदस्त म्यूजिक आज भी दर्शकों की पहली पसंद है.
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साजन: 90 के दशक की इस कल्ट रोमांटिक फिल्म में संजय दत्त ने एक अपाहिज कवि अमन की भूमिका निभाई थी. सलमान खान और माधुरी दीक्षित के साथ उनकी यह तिकड़ी सुपरहिट रही. फिल्म के गाने जैसे ‘जिया बेकरार है’ और ‘मेरा दिल भी कितना पागल है’ आज भी चार्टबस्टर हैं. इस फिल्म ने साबित कर दिया कि संजू बाबा सिर्फ एक्शन ही नहीं, बल्कि सीरियस और इमोशनल रोल में भी बेमिसाल हैं.
दाग- द फायर: साल 1999 में आई यह फिल्म राज कंवर के निर्देशन में बनी एक जबरदस्त एक्शन थ्रिलर थी. फिल्म में संजय दत्त ने आर्मीमैन का किरदार निभाया था, जो अपने परिवार के साथ हुए अन्याय का बदला लेने के लिए निकलता है. चंद्रचूड़ सिंह और महिमा चौधरी के साथ उनकी केमिस्ट्री और फिल्म के गानों ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था. संजय दत्त का गंभीर और रफ-एंड-टफ लुक इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी साबित हुआ था.
मुन्नाभाई एमबीबीएस: इस फिल्म ने संजय दत्त की छवि को पूरी तरह बदल दिया. राजकुमार हिरानी की इस मास्टरपीस में उन्होंने एक ऐसे गैंगस्टर का किरदार निभाया, जो डॉक्टर बनने की कोशिश करता है. ‘जादू की झप्पी’ के संदेश ने इसे कल्ट क्लासिक बना दिया. अरशद वारसी (सर्किट) और संजय की जोड़ी ने कॉमेडी का एक नया स्टैंडर्ड सेट किया, जिसे आज भी लोग बड़े चाव से देखते हैं.
लगे रहो मुन्ना भाई: राजकुमार हिरानी के निर्देशन में बनी ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ (2006) भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है. इसमें संजय दत्त ने मुन्ना भाई के अपने आइकॉनिक किरदार को एक नए स्तर पर पहुंचाया. फिल्म ने गांधीगिरी के जरिए अहिंसा और सच्चाई का एक आधुनिक संदेश दिया, जो पूरे देश में मशहूर हुआ. विद्या बालन और अरशद वारसी (सर्किट) के साथ उनकी जुगलबंदी और बापू के साथ मुन्ना के काल्पनिक बातचीत ने दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ काफी भावुक भी किया.
अग्निपथ: इस फिल्म में संजय दत्त ने कांचा चीना का जो खूंखार अवतार दिखाया, उसने विलेन के किरदार को एक नई परिभाषा दी. उनका गंजा लुक और डरावनी मुस्कान देखकर दर्शक सहम गए थे. ऋतिक रोशन के सामने एक ताकतवर विलेन के रूप में संजय दत्त की परफॉरमेंस को काफी सराहा गया. यह फिल्म उनके करियर की सबसे बड़ी कमर्शियल हिट में से एक साबित हुई.
केजीएफ-चैप्टर 2: साल 2022 में रिलीज हुई केजीएफ चैप्टर में संजय दत्त ने अधीरा के रूप में साउथ सिनेमा में भी अपनी धाक जमाई. यश के साथ उनकी टक्कर देखने लायक थी. वाइकिंग्स से प्रेरित उनके लुक और जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस ने फिल्म में चार चांद लगा दिए. कैंसर से जंग जीतने के तुरंत बाद इस लेवल का एक्शन और परफॉर्मेंस दिखाकर साबित कर दिया कि वह इंडस्ट्री के असली खलनायक हैं.
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