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Maamla Legal Hai 2 Review: नेटफ्लिक्स की पॉपुलर सीरीज ‘मामला लीगल है’ का सीजन 2 रिलीज हो गया है. सीरीज में जज के रोल में दिख रहे रवि किशन कोर्टरूम कॉमेडी के साथ सोशल मैसेज बयां कर रहे हैं. खास बात यह है कि शो जातिवाद और जेंडर भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दों को बिना किसी उपदेश के बेहद सहज और मजाकिया अंदाज में उठाता है. कलाकारों का शानदार अभिनय और चुटीले डायलॉग इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं, जो इसे काफी ‘रिलेटेबल’ बनाते हैं. हालांकि, पहले सीजन की तुलना में इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी लगती है और कहानी कहीं-कहीं कमजोर महसूस होती है. इसके बावजूद, यह एक हल्के-फुल्के अंदाज वाला शो खूब एंटरटेन कर रहा है.

‘मामला लीगल है 2’ में रवि किशन जज बने नजर आ रहे हैं.
नई दिल्ली: सीरीज ‘मामला लीगल है’ के पहले पार्ट की लोकप्रियता के बाद मेकर्स इसका सीजन 2 लेकर आए हैं, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुका है. यह उन दर्शकों के लिए एंटरटेनमेंट का एक बढ़िया डोस है जो मार-धाड़ और थ्रिलर से हटकर कुछ हल्का-फुल्का और मजेदार देखना चाहते हैं. इस बार कहानी में बड़ा ट्विस्ट यह है कि हमारे चहेते वकील वीडी त्यागी यानी रवि किशन अब जज की कुर्सी पर बैठ चुके हैं. कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमती है कि कैसे त्यागी जी अपनी इस नई और भारी-भरकम जिम्मेदारी को निभाते हैं और साथ ही उन पुराने वकील साथियों के साथ अपने रिश्तों का तालमेल बिठाते हैं, जिनके साथ वो कभी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते थे. रवि किशन के साथ नायला ग्रेवाल, अनंत जोशी और निधि बिष्ट ने अपनी एक्टिंग से जान डाल दी है, जिससे शो काफी दिलचस्प बन पड़ा है.
सीरीज की सबसे अच्छी बात इसकी ‘रिलेटेबिलिटी’ है. कोर्ट के चक्करों और वकीलों की आपाधापी के बीच यह शो आम इंसान की छोटी-बड़ी परेशानियों, दोस्ती और रिश्तों की ऐसी झलक दिखाता है कि दर्शक खुद को इससे जुड़ाव महसूस करते हैं. शो में ऑर्गन ट्रैफिकिंग, जातिवाद और जेंडर भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दों को भी छुआ गया है, लेकिन मेकर्स की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने इसे कहीं भी भारी या उबाऊ नहीं होने दिया. सीरीज आपको सही-गलत की लंबी-चौड़ी स्पीच नहीं पिलाती, बल्कि बहुत ही सहज और मजाकिया अंदाज में आपको उन कड़वे सच के बारे में सोचने पर मजबूर कर देती है, जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं.
वीडी त्यागी निराश नहीं करते
हालांकि, अगर सीरीज की खामियों की बात करें, तो पहले सीजन के मुकाबले इस बार रफ्तार थोड़ी धीमी महसूस होती है. कुछ जगहों पर ऐसा लगता है कि कहानी एक ही जगह रुकी हुई है और आगे बढ़ने में काफी वक्त ले रही है. सीरीज की जान इसके जबरदस्त डायलॉग्स और कलाकारों की शानदार परफॉरमेंस है, जो कमजोर पड़ती कहानी को काफी हद तक संभाल लेते हैं. अगर आप इस वीकेंड कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो आपको हंसाए भी और बिना दिमाग पर बोझ डाले समाज का आईना भी दिखा दे, तो ‘मामला लीगल है 2’ एक अच्छा विकल्प कहा जा सकता है. बस थोड़ी धीमी शुरुआत के लिए खुद को तैयार रखिएगा, बाकी वीडी त्यागी का जज अवतार आपको निराश नहीं करेगा.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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