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Tamanna Bhatia News: मद्रास हाई कोर्ट ने अभिनेत्री तमन्ना भाटिया की ₹1 करोड़ हर्जाने की अपील खारिज कर दी है. हाईकोर्ट ने कहा कि वह यह साबित करने में नाकाम रहीं कि एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी कंपनी ने उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल किया.

तमन्ना भाटिया को मद्रास हाईकोर्ट से झटका लगा है (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. मद्रास हाईकोर्ट ने अभिनेत्री तमन्ना भाटिया को बड़ा झटका देते हुए उनकी अपील खारिज कर दी है. यह मामला एक एंडोर्समेंट एग्रीमेंट से जुड़ा था जिसमें उन्होंने कंपनी पावर सोप्स लिमिडेट पर आरोप लगाया था कि कॉन्ट्रेक्ट खत्म होने के बाद भी उनकी फोटो का इस्तेमाल किया गया.
दरअसल, तमन्ना भाटिया ने ₹1 करोड़ के हर्जाने की मांग करते हुए यह अपील दायर की थी. उन्होंने दावा किया था कि कंपनी ने एग्रीमेंट की अवधि समाप्त होने के बावजूद उनके फोटो का उपयोग अपने प्रोडक्ट्स के प्रचार में जारी रखा जिससे उनके पेशेवर अवसरों पर असर पड़ा.
हालांकि, कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह मामला सबूतों के स्तर पर कमजोर साबित हुआ. जस्टिस पी.वेलमुरुगन और जस्टिस के.गोविंदराजन थिलकावडी की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के पहले के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि अभिनेत्री यह साबित नहीं कर पाईं कि कंपनी ने अनुबंध समाप्त होने के बाद भी उनकी तस्वीरों का उपयोग किया.
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद साल 2008 में हुए एक एग्रीमेंट से शुरू हुआ था. इस समझौते के तहत तमन्ना ने कंपनी को अपने साबुन उत्पादों के प्रमोशन के लिए एक साल तक अपनी तस्वीरें इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी जो अक्टूबर 2009 में खत्म हो गई थी. तमन्ना का आरोप था कि 2010-2011 के दौरान भी कंपनी ने उनके फोटो प्रोडक्ट रैपर, विज्ञापनों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इस्तेमाल किए. उन्होंने कहा कि इससे उनके अन्य ब्रांड्स के साथ होने वाले संभावित समझौतों पर असर पड़ा.
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पेश किए गए सबूत भरोसेमंद नहीं थे. प्रोडक्ट रैपर और ऑनलाइन लिस्टिंग से स्पष्ट नहीं था कि कंपनी ही जिम्मेदार है. कथित नुकसान और कंपनी की कार्रवाई के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हुआ. इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने कहा कि दावा ठोस साक्ष्यों से समर्थित नहीं है इसलिए हर्जाने और स्थायी रोक (इंजंक्शन) की मांग खारिज की जाती है.
डिवीजन बेंच का फैसला
डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि सिंगल जज का फैसला सही था और उसमें किसी तरह की कानूनी त्रुटि नहीं है। इसके साथ ही तमन्ना की अपील भी खारिज कर दी गई. इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि बिना मजबूत और विश्वसनीय सबूतों के इस तरह के कमर्शियल विवादों में कोर्ट राहत देने से परहेज करता है.
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